एक थेरेपी जो बिहारी जी और महाराज जी का दर्शन करा देती है

MRC थेरेपी: बांके बिहारी जी के दर्शन और दिव्य अनुभूति का विज्ञान

प्रस्तावना

भारतवर्ष की अध्यात्मिक धरोहर में वृंदावन और विशेषकर बांके बिहारी जी का स्थान अत्यंत विशेष है। यहां भक्तगण सदियों से अलौकिक अनुभव प्राप्त करते आ रहे हैं। किंतु एक आम प्रश्न यह उठता है कि क्या इन अनुभूतियों को बिना मंदिर आए, केवल मानसिक अवस्था या विशेष चिकित्सा पद्धति से भी पाया जा सकता है? इसी रहस्य को सुलझाती है—MRC थेरेपी

इस लेख में हम MRC थेरेपी (MRC Therapy) के माध्यम से बांके बिहारी जी के दिव्य दर्शन और मानसिक परिक्रमा का विस्तार से अध्ययन करेंगे। हम जानेंगे कि किस प्रकार प्रेमानंद महाराज जी के एक शिष्य ने ऑपरेशन के दौरान इसी थेरेपी से वृंदावन की परिक्रमा और महाराज जी के दर्शन तक की अचूक अनुभूति की, और कैसे हज़ारों लोग अब घर बैठे वही अनुभूति प्राप्त कर सकते हैं जो मंदिर में सशरीर जाकर मिलती है।

MRC थेरेपी क्या है? (What is MRC Therapy?)

MRC थेरेपी का पूरा नाम है “Mind Relaxation & Consciousness Therapy।” इसे आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अभिषेक शर्मा ने विकसित किया है। यह थेरेपी मस्तिष्क के अवचेतन (सबकॉन्शियस माइंड) को सक्रिय कर, व्यक्ति को गहरे रिलैक्सेशन की स्थिति में ले जाती है। जब चेतन मन (Conscious Mind) एकदम शांत और विचार हीन हो जाता है, तो अवचेतन मन के द्वार खुल जाते हैं और व्यक्ति अलौकिक अनुभूतियों का आसानी से अनुभव करता है।

प्रारंभिक प्रयोग और सिद्धि

डॉ. शर्मा ने प्रथम बार इसे अपनी सर्जरी के मरीजों पर लागू किया, जहां स्थानीय या सामान्य एनेस्थीसिया की आवश्यकता नहीं रही—सिर्फ थेरेपी सुनते-सुनते मरीज अर्धविहोशी (Semi-conscious) स्थिति में पहुंच जाते और बिना पीड़ा के सर्जरी संभव हो जाती। यह चिकित्सा विज्ञान में नूतन प्रयोग था, जिससे उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल हुआ।

थेरेपी की प्रक्रिया और विज्ञान

चेतन और अवचेतन मन का संतुलन

आयुर्वेद अनुसार, मन दो भागों में बंटा है—चेतन (Conscious) और अवचेतन (Sub-conscious)। जहां चेतन मन प्रकृति, तर्क, और विचारों में उलझा रहता है, वहीं अवचेतन मन ब्रह्मांडीय ऊर्जा और अलौकिक अनुभूतियों का केंद्र है। जब विचार शांत होते हैं, तब अवचेतन मन की शक्ति प्रकट होती है। MRC थेरेपी का उद्देश्य इसी अवस्था तक व्यक्ति को ले जाना है।

थेरेपी का सत्र कैसे होता है?

  • मरीज या इच्छुक साधक को रिलैक्स पोजीशन में लिटाया जाता है।
  • हेडफोन के माध्यम से विशेष ऑडियो थेरेपी सुनवाई जाती है, जिसमें मंथर शब्द, विशेष संगीत और निर्देश होते हैं।
  • यह थेरेपी धीरे-धीरे व्यक्ति को गहरे विश्राम की अवस्था (Trance) में ले जाती है।
  • चेतन मन सो जाता है, अवचेतन जागृत हो जाता है। यहाँ से विशेष भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभूतियाँ प्रारंभ हो जाती हैं।

बांके बिहारी जी के दर्शन कैसे होते हैं?

डॉ. शर्मा के अनुसार, इस थेरेपी के दौरान कई मरीजों को ऐसा अनुभव होता है कि वे स्वयं वृंदावन में, बांके बिहारी जी के सम्मुख उपस्थित हैं। जिन अनुभूतियों का वर्णन भक्त वर्षों मंदिर जा-जाकर भी नहीं कर सकते, वही घर बैठे थेरेपी से संभव हो जाती हैं।

अनुभव की गहराई

  • लोगों को बांके बिहारी जी की कृपा से मंदिर की दिव्यता, सौंधी खुशबू, फूलों की माला अपने गले में पड़ती महसूस होती है।
  • कई बार शरीर में कंपन, आंखों से आंसू, और अत्यंत सुख-शांति की अनुभूति होती है।
  • कुछ को ऐसा लगता है जैसे भगवान ने हाथ रखा हो या स्पर्श किया हो।
  • मन का सूक्ष्म शरीर वृंदावन पहुंच जाता है—ठाकुर जी को देखकर, उनकी वाणी, बांसुरी की ध्वनि और वहां का वातावरण सहज ही अनुभव होने लगता है।

प्रेमानंद महाराज के शिष्य का चमत्कारी अनुभव

वीडियो में आया उदाहरण—प्रेमानंद महाराज जी के एक शिष्य का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान उन्हें MRC थेरेपी सुनाई गई। वे ऐसे गहरे ट्रांस में चले गए कि सर्जरी की पीड़ा का अहसास ही नहीं हुआ। उठने पर उन्होंने भाव-विभोर होकर बताया कि उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ जैसे प्रेमानंद जी स्वयं उनके साथ थे और साथ-साथ वृंदावन की परिक्रमा भी कराई।

मनोवैज्ञानिक पक्ष

मरीज भूल जाता है कि वह ऑपरेशन टेबल पर है, मस्तिष्क पूरी तरह सकून में चला जाता है। यही वो अवस्था है जिसमें भक्त अपने आराध्य के साथ एकात्मकता अनुभव करता है।

सामान्य अनुभव

  • सर्जरी की पीड़ा का अनुभव नहीं होता।
  • थेरेपी के दौरान आने वाली अनुभूति इतनी गहन होती है कि उठते ही आंखों से आंसू बह रहे थे, शरीर में कंपन था।
  • मन को जीवन का कभी न भूला जा सकने वाला शांतिपूर्ण अनुभव मिलता है।

चिकित्सकीय और आध्यात्मिक लाभ

MRC थेरेपी न केवल ऑपरेशन के मरीजों के दर्द व डर को न्यूनतम करती है, बल्कि इससे जुड़े आध्यात्मिक लाभ कई गुना ज्यादा गहरे हैं।

  • माइंड रिलैक्सेशन — व्यक्ति रोजमर्रा के तनाव, चिंता और बेचैनी से मुक्त होता है।
  • आध्यात्मिक जागरण — ब्रह्मांडीय ऊर्जा का अनुभव और भगवद्प्राप्ति की अनुभूति होती है।
  • अध्ययन में लाभ — बच्चों के लिए विशेष थेरेपी बनाई गई है, जिससे पढ़ाई में मन लगता है और रिजल्ट बेहतर आते हैं।
  • व्यक्तित्व में उत्साह और सकारात्मकता बढ़ती है।

थेरेपी की व्यापकता और प्रयोज्यता

MRC थेरेपी अब केवल वृंदावन तक सीमित नहीं है। जिन्हे मंदिर नहीं पहुंच सकते, वे वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से यह अलौकिक अनुभव घर पर ही ले सकते हैं।

  • ऐप—MRC Therapy प्ले स्टोर और वेबसाइट (mrctherapy.com) पर उपलब्ध है।
  • विभिन्न प्रकार की थेरेपी — भक्तों के लिए वृंदावन परिक्रमा, बांके बिहारी जी के दर्शन, हनुमान जी, काली मां, राधा रमण जी, राधा वल्लभ जी, बागेश्वर धाम सरकार आदि के लिए विशेष थेरेपीज उपलब्ध हैं।

क्यों लें यह थेरेपी?

  • जो सिर्फ दर्शन की चाह रखते हैं, उनके लिए।
  • जो घर से दूर रहकर भी तीर्थ के धर्मिक लाभ प्राप्त करना चाहते हैं।
  • जो बच्चों की पढ़ाई में मन और राष्ट्रीय संस्कार जागृत करना चाहते हैं।
  • जो तनाव और अवसाद से मुक्ति चाहते हैं।
  • जिनके जीवन के अंतिम समय में भगवद्प्राप्ति की लालसा है—उनके लिए विशेष कोडिंग थेरेपी भी बनाई गई है ताकि अंतिम श्वास में ठाकुर जी का स्मरण रहे।

सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव

MRC थेरेपी धार्मिक विश्वासों को आधुनिक विज्ञान और मनोविज्ञान से जोड़ती है। आज के डिजिटल युग में जहां परिवार, दादा-दादी के किस्से बच्चों से दूर होते जा रहे हैं, यह थेरेपी सनातन मूल्यों और राष्ट्र भावना को मन-मस्तिष्क में स्थापि‍त करने में बड़ी भूमिका निभा रही है।

आलोचना, विश्वास और सतर्कता

  • डॉ. शर्मा स्पष्ट कहते हैं कि ये अनुभूति उन पर काम नहीं करती जो केवल परखने या जाँचने का भाव लेकर आते हैं। विश्वास और श्रद्धा आवश्यक है।
  • यह अनुभव 10 में से 8-9 लोगों पर गहरा असर करता है, भाग्य और आस्था का भी बड़ा योगदान है।

निष्कर्ष

MRC थेरेपी आज एक वैज्ञानिक, आयुर्वेदिक और आध्यात्मिक सेतु बन गई है, जहां बांके बिहारी जी के दिव्य दर्शन, वृंदावन की परिक्रमा और अलौकिक अनुभव अब घर बैठे, केवल 10-15 मिनट की थेरेपी सुनकर संभव हो जाते हैं।

यह थेरेपी न केवल भक्तों के लिए बल्कि आम जनमानस—बच्चों, विद्यार्थियों, रोगियों, वृद्धों—सभी के लिए प्रसन्नता, मानसिक शांति और दिव्यता की नई चेतना लेकर आई है। भारतवर्ष की सनातन संस्कृति, इस तरह आधुनिक तकनीक और चिकित्सा के माध्यम से, वैश्विक पटल पर एक नई ऊर्जा के साथ प्रतिध्वनित हो रही है।


यदि आप वृंदावन नहीं जा पा रहे हैं, फिर भी परिक्रमा, दर्शन या भगवद् सान्निध्य की अनुभूति चाहते हैं, तो एक बार MRC थेरेपी का अनुभव अवश्य लें। “राधे राधे!”

(यह लेख दिए गए वीडियो साक्षात्कार और उसमें मौजूद संवाददाताओं की चर्चा के आधार पर तैयार किया गया है।)

Related Posts

साधक के लिए अनिवार्य 6 शुद्धियाँ: मन, वाणी, अन्न और जीवन को पवित्र बनाने वाले सूत्र

प्रस्तावना : भीतर की अशांति का असली कारण आज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में तनाव, चिंता, मानसिक दबाव और असंतोष से जूझ रहा है।…

Continue reading
बीच कथा में महाराज जी बच्चों पर क्यों गुस्सा हुए? श्री देवकीनंदन ठाकुर जी की डांट में छिपा गहरा मर्म

परिचय: महाराज जी की डांट या करुणा? अक्सर जब हम किसी संत को मंच से किसी बच्चे या श्रोता को डांटते देखते हैं तो तुरंत सोच लेते हैं – “इतनी…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

साधक के लिए अनिवार्य 6 शुद्धियाँ: मन, वाणी, अन्न और जीवन को पवित्र बनाने वाले सूत्र

साधक के लिए अनिवार्य 6 शुद्धियाँ: मन, वाणी, अन्न और जीवन को पवित्र बनाने वाले सूत्र

बच्चों की शॉर्टकट आदत: गाइड और चैटGPT पर निर्भरता का सच

बच्चों की शॉर्टकट आदत: गाइड और चैटGPT पर निर्भरता का सच

SIP पर 0% टैक्स कैसे दें? यह बड़ा टैक्स रूल 99% लोगों को नहीं पता

SIP पर 0% टैक्स कैसे दें? यह बड़ा टैक्स रूल 99% लोगों को नहीं पता

पत्रकार अंशुमन तिवारी ने बताया देश की अर्थव्यवस्था का सच जो कोई नहीं बताएगा

पत्रकार अंशुमन तिवारी ने बताया देश की अर्थव्यवस्था का सच जो कोई नहीं बताएगा

यूट्यूब फिनफ्लुएंसर बनाम असली वित्तीय सलाहकार: अपने पैसों को नकली गुरुओं से कैसे बचाएं

यूट्यूब फिनफ्लुएंसर बनाम असली वित्तीय सलाहकार: अपने पैसों को नकली गुरुओं से कैसे बचाएं

बीच कथा में महाराज जी बच्चों पर क्यों गुस्सा हुए? श्री देवकीनंदन ठाकुर जी की डांट में छिपा गहरा मर्म

बीच कथा में महाराज जी बच्चों पर क्यों गुस्सा हुए? श्री देवकीनंदन ठाकुर जी की डांट में छिपा गहरा मर्म