REITs और InvITs: बिना प्रॉपर्टी खरीदे किराये और इंफ्रा इनकम कमाने का स्मार्ट तरीका

यह लेख निवेश के बारे में एक आइडिया देता है. आप इसके आधार पर आँख मूंदकर निवेश ना करे. अपने फाइनेंसियल एडवाइजर से बात करके ही निवेश करे. हम आपकी म्यूच्यूअल फण्ड, AIF और इन्सुरेंस में निवेश के लिए मदद कर सकते है. 9953367068 पर बात कर सकते हैं.

REITs और InvITs ऐसे निवेश साधन हैं जिनसे आप कम पूंजी में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में हिस्सा लेकर नियमित आय और लम्बी अवधि में ग्रोथ दोनों का लक्ष्य रख सकते हैं। लेकिन इनमें मार्केट रिस्क, ब्याज दरों में बदलाव, प्रोजेक्ट की आय घटने और रेग्युलेटरी बदलाव जैसे जोखिम भी होते हैं, इसलिए ये केवल समझदार और मध्यम से लम्बी अवधि वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।


REITs और InvITs का आसान परिचय

  • REIT का फुल फॉर्म है Real Estate Investment Trust, यानी ऐसा ट्रस्ट/कंपनी जो ऑफिस, मॉल, कॉमर्शियल बिल्डिंग जैसी आय देने वाली प्रॉपर्टीज में निवेश करती है और उनसे आने वाला किराया यूनिट होल्डर्स को बांटती है।kotakmf+2
  • InvIT का फुल फॉर्म है Infrastructure Investment Trust, जो हाईवे, टोल रोड, पावर ट्रांसमिशन लाइन, गैस पाइपलाइन, वेयरहाउस जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में निवेश करता है और इनसे मिलने वाली यूसेज फीस या टोल इत्यादि से आय कमाता है।bajajfinserv+2
  • इन दोनों की यूनिट्स स्टॉक एक्सचेंज (NSE/BSE) पर शेयरों की तरह लिस्टेड रहती हैं, यानी आप अपने डीमैट अकाउंट से इन्हें सामान्य शेयर की तरह खरीद–बेच सकते हैं।jagran+2

काम कैसे करते हैं?

  • ये दोनों आम तौर पर म्यूचुअल फंड की तरह “पूल्ड इन्वेस्टमेंट” मॉडल पर काम करते हैं – कई छोटे–छोटे निवेशकों से पैसा लेकर बड़े प्रॉपर्टी/इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में लगाया जाता है।icicidirect+2
  • स्ट्रक्चर में आमतौर पर तीन मुख्य पार्ट होते हैं: स्पॉन्सर (जो प्रोजेक्ट लाता है), ट्रस्टी (जो निवेशकों के हितों की देखरेख करता है) और मैनेजर (जो रोज़–मर्रा का मैनेजमेंट करता है)।groww+1
  • SEBI के नियमों के अनुसार REITs और InvITs को अपनी नेट डिस्ट्रिब्यूटेबल कैश फ्लो (NDCF) का कम–से–कम 90% निवेशकों को नियमित तौर पर बांटना होता है, ताकि इन्हें आय–केंद्रित प्रोडक्ट माना जा सके।kotakmf+1

REITs क्या होते हैं? (रियल एस्टेट वाला हिस्सा)

  • REIT मुख्य रूप से कॉमर्शियल रियल एस्टेट जैसे ऑफिस पार्क, IT पार्क, मॉल, बिज़नेस पार्क, वेयरहाउस इत्यादि में निवेश करते हैं जो पहले से तैयार और किराया दे रहे होते हैं।zerodha+3
  • नियम के तहत आमतौर पर REIT की कुल एसेट का कम से कम 80% हिस्सा ऐसी पूरी हो चुकी, आय उत्पन्न करने वाली प्रॉपर्टीज में लगा होना चाहिए, जबकि अधिकतम 20% हिस्सा ही अंडर–कंस्ट्रक्शन या अन्य योग्य निवेशों में जा सकता है।groww
  • ये प्रॉपर्टीज किराए पर दी जाती हैं, किराया इकट्ठा कर के कुछ हिस्सा खर्चों/कर्ज की पेमेंट में जाता है और बचा हुआ हिस्सा निवेशकों को डिविडेंड/इंटरेस्ट/डिस्ट्रीब्यूशन के रूप में दिया जाता है।zerodha+2

InvITs क्या होते हैं? (इंफ्रास्ट्रक्चर वाला हिस्सा)

  • InvIT सड़कों, टोल रोड, पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क, गैस/ऑयल पाइपलाइन, सोलर/विंड पावर प्रोजेक्ट्स, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में निवेश करते हैं।investor.sebi+3
  • InvIT को भी कम से कम 80% एसेट्स ऐसे प्रोजेक्ट्स में लगाने होते हैं जो पहले से चालू हों और उनसे रेगुलर कैश फ्लो आ रहा हो; 20% तक ही अन्य योग्य निवेशों में जा सकता है।groww
  • यहाँ आय का मुख्य स्रोत होता है टोल कलेक्शन, ट्रांसमिशन चार्ज, यूसेज फीस आदि, जो लंबे कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए अपेक्षाकृत प्रेडिक्टेबल कैश फ्लो बनाते हैं, और इसका बड़ा हिस्सा यूनिट होल्डर्स तक पहुंचाया जाता है।kotakmf+2

REITs और InvITs से पैसा कैसे बनता है?

आपको दो तरह से कमाई की संभावना रहती है:

  • नियमित कैश फ्लो:
    • किराया (REITs में) या टोल/यूसेज फीस (InvITs में) से जो नेट इनकम बचती है, उसका बड़ा हिस्सा आपको क्वार्टरली या पीरियडिक डिस्ट्रीब्यूशन के रूप में मिलता है।zerodha+2
    • SEBI के नियमों के कारण इन्हें 90% तक कैश फ्लो बांटना पड़ता है, जिससे इन्हें “रेगुलर इनकम” प्रोडक्ट माना जाता है; हालांकि मात्रा और स्थिरता प्रोजेक्ट पर निर्भर है और गारंटीड नहीं।kotakmf+2
  • कैपिटल गेन (भाव बढ़ने से):
    • अगर समय के साथ underlying एसेट्स का वैल्यू और रेंटल/यूसेज आय बढ़ती है या इंटरेस्ट रेट्स फेवरेबल रहते हैं, तो REIT/InvIT की यूनिट प्राइस भी ऊपर जा सकती है; आप ऊँचे दाम पर बेचकर कैपिटल गेन कमा सकते हैं।groww+2

कुछ एनालिसिस में हाल के वर्षों में REITs और InvITs ने कई बार Nifty 50 से बेहतर रिटर्न दिखाए हैं, लेकिन ये पीरियड–स्पेसिफिक होता है और आगे भी वैसा ही रिटर्न मिलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है।instagram+1


रिटर्न की संभावनाएँ – कितनी उम्मीद रखनी चाहिए?

  • सामान्य तौर पर ये प्रोडक्ट्स “हाइब्रिड” नेचर के माने जाते हैं – न पूरी तरह फिक्स्ड इनकम जैसे, न पूरी तरह इक्विटी जैसे; इनसे अक्सर 7–10% के आसपास यील्ड (डिस्ट्रीब्यूशन) की उम्मीद की जाती है, और ऊपर से कुछ कैपिटल एप्रिसिएशन भी हो सकता है, पर ये पूरी तरह मार्केट और प्रोजेक्ट की परफॉर्मेंस पर निर्भर है।zerodha+2
  • अगर अर्थव्यवस्था अच्छी चल रही हो, ऑक्युपेंसी हाई हो, किराए या टैरिफ में समय–समय पर बढ़ोतरी हो रही हो, और ब्याज दरें बहुत तेज न बढ़ रही हों, तो रिटर्न अपेक्षाकृत अच्छा रह सकता है; उलटी परिस्थितियों में रिटर्न काफी कमजोर भी हो सकता है।kotakmf+2
  • हाल की रिपोर्ट्स में ये भी दिखा है कि इंश्योरेंस रेगुलेटर REITs और InvITs में इंश्योरेंस कंपनियों की निवेश सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है, जिससे इस सेक्टर में इंस्टिट्यूशनल पार्टिसिपेशन और भी बढ़ सकता है, पर इसका मतलब “रिस्क खत्म” नहीं होता, बस यह दर्शाता है कि इन्हें मेनस्ट्रीम विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।whalesbook

मुख्य रिस्क और नुकसान की संभावनाएँ

REITs और InvITs में निवेश करते समय आपको इन प्रमुख जोखिमों को समझना ज़रूरी है:

  • मार्केट रिस्क और यूनिट प्राइस वोलैटिलिटी:
    • REITs/InvITs की यूनिट्स शेयरों की तरह एक्सचेंज पर ट्रेड होती हैं, इसलिए मार्केट सेंटिमेंट, ब्याज दरों के बदलाव और इक्विटी मार्केट की गिरावट–बढ़त से इनके दाम काफी ऊपर–नीचे हो सकते हैं।groww+1
    • अगर आपने ऊँचे भाव पर खरीदा और किसी कारणवश मार्केट गिर गया या सेक्टर पर नेगेटिव न्यूज़ आई, तो आपको कैपिटल लॉस हो सकता है, खासकर अगर आप मजबूरी में कम समय में बेचना पड़ जाए।zerodha+1
  • आय में अनिश्चितता:
    • REITs के केस में अगर ऑफिस/मॉल की ऑक्युपेंसी घट जाए, किरायेदार शिफ्ट हो जाएँ, किराया रिन्यू न करें या रेंटल रेट्स नीचे आ जाएँ तो कैश फ्लो घट सकता है और डिस्ट्रीब्यूशन भी कम हो सकता है।kotakmf+2
    • InvITs में अगर टोल कलेक्शन कम हो, यूसेज घटे, रेग्युलेटरी टैरिफ कट जाए, या प्रोजेक्ट की परफॉर्मेंस खराब हो जाए तो आय पर सीधा असर पड़ता है।groww+2
  • ब्याज दर रिस्क:
    • जब मार्केट में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो फिक्स्ड इनकम और सुरक्षित विकल्पों की यील्ड बढ़ जाती है, ऐसे में REITs/InvITs की यूनिट प्राइस पर नेगेटिव प्रेशर आता है क्योंकि निवेशक उच्च सुरक्षित यील्ड की ओर शिफ्ट होते हैं।zerodha+2
    • साथ ही, इन ट्रस्ट्स के पास अक्सर काफ़ी कर्ज होता है; ब्याज दर बढ़ने पर इनकी इंटरेस्ट कॉस्ट बढ़ती है, जिससे नेट कैश फ्लो और डिस्ट्रीब्यूशन कम हो सकता है।groww+1
  • लिक्विडिटी रिस्क:
    • भले ही एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं, लेकिन हर REIT या InvIT में ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत ज्यादा नहीं होता; कुछ इकाइयों में बाय–सेल स्प्रेड बड़ा हो सकता है या मनचाहा क्वांटिटी/प्राइस पर एग्जिट मुश्किल हो सकता है।zerodha+1
  • रेग्युलेटरी और प्रोजेक्ट–स्पेसिफिक रिस्क:
    • सरकार की पॉलिसी, टैक्स नियम, टैरिफ स्ट्रक्चर, स्टाम्प ड्यूटी, लीज़ नियम आदि में बदलाव इनकी आय और वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकते हैं।investor.sebi+1
    • साथ ही किसी एक–दो बड़े किरायेदार के निकलने, कानूनी विवाद, प्रोजेक्ट डिले, मैनेजमेंट की कमजोर क्वालिटी आदि का specific जोखिम भी रहता है।

टैक्स के मुख्य पॉइंट्स (ओवरव्यू)

ध्यान रहे कि REITs और InvITs में टैक्स ट्रीटमेंट थोड़ा complex है और समय–समय पर बदल भी सकता है, इसलिए यहाँ सिर्फ broad आइडिया दिया जा रहा है; actual निवेश के पहले latest नियम देखना ज़रूरी है।

  1. डिस्ट्रीब्यूशन पर टैक्स:
    • REIT/InvIT से मिलने वाला कैश आपके पास कई तरह के कंपोनेंट में आ सकता है – interest income, dividend, return of capital आदि; हर कंपोनेंट पर अलग टैक्स नियम लागू हो सकते हैं।zerodha
    • सामान्यत:
      • Interest component को आपकी slab के हिसाब से “income from other sources” माना जा सकता है।
      • Dividend component पर टैक्स कंपनी/ट्रस्ट और इन्वेस्टर की status के हिसाब से अलग–अलग हो सकता है (कई बार इन्वेस्टर की slab पर टैक्स)।
      • Return of capital वाला हिस्सा तुरंत taxable न हो पर बाद में cost of acquisition adjust होने के कारण capital gains कैलकुलेशन पर असर डाल सकता है।zerodha
  2. कैपिटल गेन टैक्स (यूनिट बेचने पर):
    • अगर आप REIT/InvIT की यूनिट्स स्टॉक एक्सचेंज पर बेचते हैं, तो holding period के आधार पर Short Term या Long Term Capital Gain टैक्स लागू होता है; threshold और rate equity–like ही माने गए हैं या उनके करीब रखे गए हैं (जैसे कुछ केसों में 36 महीनों से अधिक पर long term)।groww+1
    • Short term पर आपके slab के हिसाब से या notified rate के हिसाब से टैक्स हो सकता है, और long term पर concessional rate (जैसे 10%) लागू हो सकता है, लेकिन ये समय–समय पर बदल सकता है, इसलिए actual investment से पहले current Finance Act और SEBI/IT Act की गाइडलाइन्स जरूर देखें।groww
  3. TDS और reporting:
    • कुछ तरह की distributions पर TDS कट सकता है और इन्हें आपको ITR में सही head के अंतर्गत दिखाना होता है, इसलिए CA या tax expert से सलाह लेना prudent होता है, खासकर अगर आप high slab या बड़े अमाउंट से invest कर रहे हैं।zerodha


किन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं?

REITs और InvITs किन लोगों के लिए relatively बेहतर माने जा सकते हैं:

  • नियमित cash flow चाहने वाले निवेशक:
    • रिटायर्ड व्यक्ति या वे लोग जिन्हें नियमित interval पर कुछ cash flow चाहिए, पर वे सीधे प्रॉपर्टी खरीदने का झंझट नहीं लेना चाहते (किराएदार ढूँढना, maintenance, कानूनी पेपरवर्क आदि)।
  • moderate risk, medium–long term horizon वाले investor:
    • जो pure equity की high volatility से थोड़ा बचना चाहते हैं, पर FD जैसी low fixed return से संतुष्ट नहीं हैं, वे portfolio में 10–20% allocation के रूप में REIT/InvIT जैसे प्रोडक्ट add कर सकते हैं।kotakmf+1
  • diversification चाहने वाले:
    • जिनके portfolio में पहले से equity mutual funds, debt, gold आदि हैं और वे real estate या infrastructure as an asset class को भी छोटे ticket size के साथ add करना चाहते हैं।investor.sebi+2
  • long term निवेशक:
    • जो 5–7 साल या उससे ज़्यादा का horizon रखते हैं, ताकि short term volatility और interest rate cycle के प्रभाव को absorb कर सकें और time के साथ rentals/usage charges में होने वाली बढ़ोतरी से benefit ले सकें।kotakmf+1

किन लोगों के लिए ठीक नहीं?

कुछ investors के लिए ये product उतने उचित नहीं हो सकते:

  • जो लोग capital safety first चाहते हैं:
    • जिनका primary objective है capital का बिल्कुल भी ना घटना (जैसे केवल capital protection mindset वाले senior citizens), उनके लिए government-backed debt या insured products ज्यादा उपयुक्त हो सकते हैं, क्योंकि REIT/InvIT की unit price गिर भी सकती है।groww+1
  • बहुत short term traders या speculators:
    • ये products मूल रूप से income + stability oriented हैं, high-frequency trading या short–term speculation के लिए design नहीं किए गए; low liquidity और lower volatility के कारण यहां intraday या very short term में limited scope होता है।groww+1
  • complex tax & structure समझने में hesitation रखने वाले:
    • जिनको अलग–अलग component (interest, dividend, ROC) और उनकी tax treatment समझने में difficulty है और जो documentation/ITR में detail से comfort नहीं रखते, उन्हें पहले अच्छे से समझ कर ही entry करनी चाहिए।

REITs vs InvITs – बुनियादी फर्क (संक्षेप में)

पहलूREITs (Real Estate)InvITs (Infrastructure)
underlying assetऑफिस, मॉल, कॉमर्शियल real estate, वेयरहाउस आदिbajajfinserv+2हाईवे, टोल रोड, power transmission, pipelines, warehouses आदिinvestor.sebi+3
आय का स्रोतकिराया और lease rentalskotakmf+2टोल, transmission/usage charges, long-term infra contractskotakmf+2
cash flow natureeconomic cycle और occupancy पर अधिक निर्भरkotakmf+1लम्बे कॉन्ट्रैक्ट और regulated tariffs की वजह से अपेक्षाकृत predictablekotakmf+1
risk profilecommercial real estate demand, vacancy riskkotakmf+1policy, traffic/usage, regulatory और project riskkotakmf+1
investor objectiverental income + property–like growth exposurekotakmf+1stable infra cash flow + moderate growthkotakmf+1

व्यावहारिक टिप्स – अगर आप invest करने की सोच रहे हैं

  • पहले product समझें, नाम नहीं:
    • हर REIT/InvIT का offer document (या factsheet) जरूर पढ़ें – कौन–कौन सी properties/projects हैं, occupancy/traffic level क्या है, average lease tenure कितना है, sponsor कौन है, कितनी leverage है आदि।kotakmf+1
  • return expectation realistic रखें:
    • इन्हें FD की तरह fixed या guaranteed return समझना गलती होगी; यह market linked product है, जिसमें distribution और unit price दोनों बदल सकते हैं।kotakmf+2
  • portfolio में limit तय करें:
    • आम तौर पर सलाह दी जाती है कि कुल portfolio का limited हिस्सा (जैसे 10–20% के भीतर) ही ऐसे alternates में रखें, ताकि concentration risk कम रहे; exact प्रतिशत आपकी risk profile और goals पर depend करेगा।kotakmf+1
  • tax planning साथ–साथ करें:
    • distribution के components, TDS, ITR reporting आदि को पहले से समझकर ही investment size तय करें; high slab वालों को खास ध्यान देना चाहिए कि post–tax return कैसा दिख रहा है।groww+1


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