Neha की रातों की नींद
झारखंड के एक छोटे शहर में सरकारी दफ्तर से लौटती Neha के लिए शाम का मतलब होता था कैलकुलेटर, बैंक ऐप और बढ़ता हुआ ब्याज। आठ‑साढ़े आठ साल से नौकरी कर रही Neha की इन‑हैंड सैलरी करीब 40,500 रुपये थी, लेकिन 8,000 रुपये के बेसिक खर्च के बाद लगभग पूरा पैसा EMI और कर्ज में डूब जाता था।[youtube]
उसके पास तीन पर्सनल लोन थे –
- पहला: करीब 12 लाख का, EMI लगभग 15,785 रुपये, ब्याज लगभग 10.75% और 82 महीने बाकी।[youtube]
- दूसरा: EMI 8,578 रुपये, ब्याज 16.49% और 31 किस्तें बाकी।[youtube]
- तीसरा: करीब 32–35 हज़ार का छोटा लोन, EMI 2,074 रुपये के आसपास, 17 महीने बाकी।[youtube]
इसके अलावा 70,000 रुपये का क्रेडिट कार्ड बकाया, LIC पॉलिसी पर 1,60,000 रुपये का लोन (लगभग 29,000 ब्याज जमा) और पिता के 2 लाख रुपये भी वापस करने थे। आप्शन ट्रेडिंग में 5–5.5 लाख गंवाने के बाद Neha को समझ आ गया था कि जल्दी अमीर बनने की कोशिश ने उसे और गड्ढे में धकेल दिया है।[youtube]
MFD की एंट्री: First Meeting
एक दिन YouTube पर “₹20L Debt on ₹40K Salary – Is There a Way OUT?!” जैसा वीडियो देखकर Neha को लगा कि उसे भी किसी प्रोफेशनल से बात करनी चाहिए। वह अपने शहर के एक SEBI‑registered Mutual Fund Distributor और फाइनेंशियल प्लानर, आरव, से मिलने गई।
आरव ने पहले दिन कोई प्रोडक्ट नहीं बेचा, सिर्फ तीन काम किए:
- उसकी पूरी लोन डिटेल, सैलरी स्लिप और बैंक स्टेटमेंट निकलवाए।
- उसकी गलती – F&O ट्रेडिंग, क्रेडिट कार्ड ओवरयूज़ – को जज नहीं किया, सिर्फ नोट किया।
- एक क्लियर लक्ष्य सेट किया: “दो साल में कर्ज‑मुक्त, और 35 से 60 की उम्र तक रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना।”
Neha के पास लगभग 6,000 रुपये हर महीने “कागज़ पर” बचते थे, लेकिन असल में वो टुकड़ों में इधर‑उधर चले जाते थे – कभी पापा को 500 वापस, कभी छोटे‑मोटे खर्च। आरव ने साफ बोला – “जब तक कैश‑फ्लो पर कंट्रोल नहीं, तब तक कोई प्लान काम नहीं करेगा।”
Step 1: Risk बंद, Safety ऑन
सबसे पहले आरव ने Neha को दो सख्त फैसले करने को कहा:
- आप्शन/F&O ट्रेडिंग हमेशा के लिए बंद – सारे ऐप delete, सारे अकाउंट निष्क्रिय।
- क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तुरंत रोकना, और एक बार क्लियर होने के बाद कार्ड बंद कर देना।
Neha के पास करीब 5 लाख का गोल्ड था, ज्यादातर ज्वेलरी के रूप में, और 4–5 लाख वैल्यू की एक जमीन। आरव ने ये दो बातें क्लियर कीं:
- गोल्ड = Emergency Fund; जब तक बहुत मजबूरी न हो, इसे बेचना नहीं, सिर्फ ज़रूरत पर गोल्ड लोन एक बैक‑अप ऑप्शन रहे।
- जमीन = दीर्घकालीन पूंजी; इसे बेचकर 4–5 लाख लाकर भी 12 लाख के बड़े लोन में बहुत फर्क नहीं पड़ेगा, इसलिए इसे “लास्ट रिज़ॉर्ट” रखा गया.
इससे Neha को एक इमोशनल सिक्योरिटी मिली – “कुछ तो है मेरे पास; मैं पूरी तरह खाली नहीं हूं।”
Step 2: Debt Snowball – MFD स्टाइल
आरव ने Neha की EMI स्ट्रक्चर देखकर एक debt‑snowball जैसा प्लान बनाया, लेकिन उस पर ब्याज के हिसाब से tweak किया।
- क्रेडिट कार्ड की सफाई
Neha ने रिलेटिव को 70,000 रुपये उधार दे रखे थे, जो वापस मांगे जा सकते थे।
- आरव ने उसे emotional guilt छोड़कर politely पैसा वापिस माँगने को कहा।
- ये 70,000 सीधे क्रेडिट कार्ड क्लियर करने में जाने थे।
- क्लियर होते ही क्रेडिट कार्ड बंद – लत को जड़ से खत्म।
- सबसे छोटा लोन – Instant win
तीसरा पर्सनल लोन करीब 32–35 हज़ार का ही बचा था, EMI 2,074 रुपये और 17 महीने बचे थे।
- जनवरी 2026 से Neha हर महीने 8,000 रुपये सिर्फ इसी लोन की ओर देने लगी – यानि लगभग चार EMI जितना।
- चार महीनों में यह लोन पूरी तरह बंद हो जाता, और ब्याज भी बचता।
- दूसरा पर्सनल लोन – High interest attack
तीसरा लोन खत्म होते ही वही 8,000 रुपये दूसरे लोन (EMI 8,578, ब्याज 16.49%) पर डाल दिए गए।
- अब हर महीने इस लोन पर लगभग 17,000 रुपये जाने लगे – बेस EMI + एक्स्ट्रा।
- 31 महीनों की बजाय लगभग 15–19 महीनों में यह लोन भी क्लियर हो सकता था, खासकर जब 2026 में Neha का प्रमोशन और सैलरी बढ़नी थी।
- LIC लोन और पॉलिसी
LIC पॉलिसी 2018 की थी, जिस पर करीब 4 लाख प्रीमियम जा चुके थे और 1.6 लाख का लोन outstanding था, 29,000 ब्याज के साथ।
- आरव ने इसे “poor investment + महंगा लोन” मानते हुए surrender की सलाह दी।
- Surrender value से पहले LIC लोन adjust होगा, बचा हुआ पैसा Neha के लिए free हो सकता था या nominal।
- इसके बदले MFD ने एक pure term insurance की सलाह दी – 50 लाख से 1 करोड़ cover, सालाना लगभग 6–7 हजार की प्रीमियम के साथ, ताकि Neha की जिंदगी insured रहे लेकिन investment वाली LIC से छुटकारा मिले।
- पिता का 2 लाख लोन
जब दूसरे और तीसरे लोन बंद हो जाते, Neha के हाथ में 20–25 हजार रुपये तक surplus आ सकता था।
- आरव ने इसमें से कम से कम 7,000 रुपये हर महीने पिता का कर्ज चुकाने के लिए earmark करा दिए, ताकि 2–2.5 साल में ये भी खत्म हो जाए।
Step 3: निवेश की शुरुआत – MFD की असली ताकत
सभी कर्ज चुकाने के साथ‑साथ आरव का असली रोल था Neha को future‑focused बनाना। कर्ज खत्म होते ही पूरा पैसा खर्च बढ़ाने में न लगे, इसके लिए एक ऑटो‑सिस्टम बनाया गया:
- हर महीने 3,000 रुपये emergency fund के लिए एक हाई‑क्वालिटी लिक्विड या Arbitrage फंड में SIP के रूप में।
- 5,000 रुपये Nifty 50 index fund में – long‑term में लगभग 12% औसत रिटर्न का लक्ष्य।
- 5,000 रुपये एक अच्छी flexi‑cap mutual fund में – long‑term target लगभग 15% के आसपास।
आरव ने कंपाउंडिंग दिखाने के लिए projection बनाया:
- अगर Neha 37 की उम्र से 60 तक (लगभग 23 साल) 10,000 रुपये महीने invest रखे, तो combined return 12–15% के बीच मानकर, वह लगभग 2.35 करोड़ का कॉर्पस बना सकती है।
- इसके ऊपर उसका GPF/EPF और ग्रेच्युटी अलग से मिलेंगे, जो सरकारी नौकरी में अच्छा रहता है।
यहीं MFD की असली वैल्यू दिखती है – सिर्फ प्रोडक्ट बेचने की नहीं, बल्कि behaviour और discipline डिजाइन करने की।
Step 4: Behaviour Change और Monitoring
आरव ने Neha से कुछ “वचन” लिए:
- हर खर्च लिखना और महीने के अंत में review करना।
- साल में दो बार MFD के साथ detailed review – लोन की स्थिति, निवेश, और goals.
- नया लोन लेने से पहले कम से कम 48 घंटे wait‑rule और MFD से discuss करना।
Neha ने भी अपने तरीके बदले –
- सैलरी आते ही EMI, SIP और पापा को जाने वाले पैसे ऑटो‑डेबिट करवा दिए।
- हाथ में सिर्फ वही cash रहने दिया जो 8,000–9,000 के बेसिक खर्च के लिए चाहिए।
धीरे‑धीरे उसकी रातों की नींद वापस आने लगी। कर्ज खत्म होने का टाइमलाइन अब धुंधला डर नहीं, एक clear रोडमैप था – लगभग दो साल में बिना F&O, बिना क्रेडिट कार्ड की लत के, कर्ज‑मुक्त जीवन।
MFD क्यों ज़रूरी है ऐसी कहानियों में
Neha की कहानी जैसे ही है, वैसी ही लाखों सैलरीड लोगों की है, जिनकी आमदनी ठीक‑ठाक है लेकिन EMI और गलत प्रोडक्ट (LIC जैसे investment plans, high‑interest loans, credit cards) ने जकड़ रखा है। एक सक्षम MFD और फाइनेंशियल प्लानर इन चीजों में मदद कर सकता है:
- सही क्रम में लोन चुकाने की रणनीति बनाना ताकि ब्याज कम से कम लगे।
- गलत investment प्रोडक्ट्स (जैसे पुराने endowment/ULIP) से निकलकर pure term insurance और अच्छे mutual funds में shift कराना।
- Behaviour change – budget, discipline, और long‑term सोच develop कराना, जिससे दो साल में debt‑free और 25 साल में करोड़ों का retirement corpus बन सके।
Neha ने जब 2026 के लिए संकल्प लिया – “कोई F&O नहीं, कोई क्रेडिट कार्ड नहीं, और हर महीने disciplined investing” – तो उसके साथ खड़ा था उसका MFD, जो सिर्फ numbers नहीं, उसकी पूरी जिंदगी का financial रास्ता देख रहा था।







