आज के समय में घर की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ रही हैं कि जिनके पास अभी तक अपना घर नहीं है, वे गहरी चिंता में हैं। कई लोग सोचते हैं — क्या हम भविष्य में अपना खुद का घर खरीद भी पाएंगे?
ऐसे में जब हम, एक Financial Advisor के रूप में, इन लोगों को Mutual Funds या अन्य Financial Products में निवेश करने की सलाह देते हैं, तो अधिकतर लोग कहते हैं —
“पहले अपना घर खरीद लेंगे, उसके बाद ही इन्वेस्टमेंट करेंगे।”
लेकिन हकीकत यह है कि जिनके पास घर खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, वे लोन लेने के बाद भी मुश्किल में हैं। डाउन पेमेंट जुटाना कठिन हो गया है, EMI बढ़ रही है — और मकान का सपना दूर जाता दिखता है।
अब सोचिए, अगर आपको कोई यह कहे कि —
“आप अभी घर भी खरीद सकते हैं और साथ ही निवेश भी जारी रख सकते हैं,”
तो क्या आप यकीन करेंगे? शायद नहीं!
लेकिन दरअसल एक ऐसा तरीका है जिससे यह संभव है। इसमें न तो आपको ज़्यादा परेशान होना पड़ेगा, न अपनी लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा से समझौता करना पड़ेगा। हाँ, इस योजना में धैर्य और अनुशासन बहुत ज़रूरी है। साथ ही अगले 15–20 साल में भारतीय बाज़ार के अच्छे प्रदर्शन पर भी इसकी सफलता काफी हद तक निर्भर करती है।
अब आइए इस उदाहरण से समझते हैं:
मान लीजिए आप 1 करोड़ रुपये का घर खरीदने जा रहे हैं और आपके पास 50 लाख रुपये हैं, जिन्हें आप डाउन पेमेंट में देना चाहते हैं।
लेकिन पूरी राशि एक साथ देने के बजाय, एक स्मार्ट रणनीति अपनाएँ —
- केवल 20 लाख रुपये डाउन पेमेंट के रूप में दें।
- और बाकी 30 लाख रुपये को किसी Equity Mutual Fund में निवेश करें और वहाँ से हर माह SWP (Systematic Withdrawal Plan) के ज़रिए कुछ हिस्सा निकालें ताकि आपकी EMI या अन्य ज़रूरतें पूरी होती रहें।
इस तरह आप एक साथ दो फायदे उठा सकते हैं —
- अपना घर तुरंत खरीद सकते हैं।
- और साथ ही निवेश से बाजार की ग्रोथ का लाभ भी ले सकते हैं।
समय के साथ, आपका निवेश आपको ऐसी स्थिति में पहुँचा सकता है कि आपका मकान अंततः कहीं सस्ता पड़ जाए — क्योंकि बाजार की रिटर्न आपकी कुल लागत को काफी हद तक घटा सकती है।
ज्यादातर लोग एक करोड़ रुपये के मकान के लिए 50 लाख रुपये का डाउन पेमेंट करते हैं। बाकी 50 लाख रुपये का लोन लेते हैं। 8% ब्याज दर पर 25 साल के लिए इस लोन की ईएमआई लगभग 38,591 रुपये प्रति महीना होगी। इस तरह 25 सालों में आप कुल 1.16 करोड़ रुपये सिर्फ ईएमआई के रूप में चुकाएंगे। इसमें 50 लाख रुपये का डाउन पेमेंट भी जोड़ दें तो कुल मिलाकर आप 1.65 करोड़ रुपये खर्च करेंगे। इसका मतलब है कि आपने उसी घर के लिए 65 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में दिए।
आम आदमी कैसे खरीदता है मकान?
| डाउन पेमेंट | ₹ 50 लाख |
| लोन राशि | ₹ 50 लाख |
| मासिक EMI | ₹ 38,591 |
| 25 साल में चुकाई गई कुल EMI | ₹ 1.16 करोड़ |
| कुल खर्च (डाउन पेमेंट + EMI) | ₹ 1.65 करोड़ |
| सिर्फ ब्याज के रूप में दी गई राशि | ₹ 65 लाख |
अब नितिन कौशिक ‘SWP + EMI’ रणनीति के बारे में बताते हैं। इसे समझदार निवेशक इस्तेमाल करते हैं। इस रणनीति में आप 50 लाख रुपये का डाउन पेमेंट करने के बजाय सिर्फ 20 लाख रुपये का डाउन पेमेंट करते हैं। 80 लाख रुपये का लोन लेते हैं। इससे आपकी ईएमआई 61,745 रुपये प्रति महीना हो जाएगी। फिर आप बाकी बचे 30 लाख रुपये को म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। आप एक SWP बनाते हैं। इससे आप हर महीने 25,000 रुपये निकालकर अपनी ईएमआई का कुछ हिस्सा भरते हैं। बाकी बचे 36,745 रुपये आप अपनी सैलरी से भरते हैं।
25 सालों में आपकी कुल ईएमआई 1.85 करोड़ रुपये होगी। इसमें 20 लाख रुपये का डाउन पेमेंट भी जोड़ दें तो कुल मिलाकर आप 2.05 करोड़ रुपये खर्च करेंगे। लेकिन, यहां एक ट्विस्ट है: म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए 30 लाख रुपये 25 सालों में लगभग 11-12% की दर से बढ़कर 1.4 करोड़ रुपये हो जाएंगे। इस 1.4 करोड़ रुपये को 2.05 करोड़ रुपये में से घटा दें तो आपका शुद्ध खर्च सिर्फ 65 लाख रुपये होगा।
इसका मतलब है कि आप उसी 1 करोड़ रुपये के घर के मालिक बन जाएंगे। लेकिन, आपको सिर्फ 65 लाख रुपये ही देने होंगे, जबकि आम तरीके से आपको 1.65 करोड़ रुपये देने पड़ते। इस तरह आप 1 करोड़ रुपये बचा सकते हैं। सिर्फ इसलिए क्योंकि आपने अपने पैसे को समझदारी से इस्तेमाल किया।
समझदार लोग कैसे खरीदते हैं मकान?
| डाउन पेमेंट | ₹ 20 लाख |
| लोन राशि | ₹ 80 लाख |
| मासिक EMI | ₹ 61,745 |
| म्यूचुअल फंड में निवेश | ₹ 30 लाख |
| मासिक SWP (म्यूचुअल फंड से) | ₹ 25,000 |
| सैलरी से EMI का हिस्सा | ₹ 36,745 |
| 25 साल में चुकाई गई कुल EMI | ₹ 1.85 करोड़ |
| 25 साल में कुल खर्च (डाउन पेमेंट + EMI) | ₹ 2.05 करोड़ |
| 25 साल में म्यूचुअल फंड की बढ़ी हुई राशि | ~₹ 1.4 करोड़ |
| शुद्ध खर्च (कुल खर्च – म्यूचुअल फंड से प्राप्त राशि) | ₹ 65 लाख |
SWP से पैसे निकालने पर टैक्स लगता है। फिलहाल, 1 लाख रुपये से ज्यादा के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर 10% टैक्स लगता है। इसके अलावा, यह भी जरूरी है कि बाजार में हमेशा अच्छा रिटर्न मिले, इसकी कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में यह रणनीति तभी काम करती है जब आप लंबे समय के लिए निवेश करते हैं और धैर्य रखते हैं। लेकिन, आप इसे अगर सही तरीके से करते हैं तो यह आपके पैसे को आपके लिए काम करने का एक शानदार तरीका है।






