भूत-प्रेत कहाँ रहते हैं ? किनको पकड़ते हैं ? उनसे कैसे बचें ? Where do ghosts live? , Whom do you catch? How to avoid them? Ghost Mystery hindi,English (EN)

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चौरासी लाख योनियों में एक प्रेतयोनि है। प्रेतयोनि में भी कई प्रकार है ब्रह्मराक्षस और अग्नि बैताल, चुड़ैल आदि होते हैं। ये सब महान कष्ट देने वाले हैं।

अगर आप देवदास होकर भजन नहीं करेंगे तो आप ऐसी अशुभ योनियों को प्राप्त होंगे।

किसी भी द्वार से शरीर में प्रवेश

ये मनुष्य शरीर में किसी भी द्वार से प्रवेश कर सकते हैं। आँख से, त्वचा से किसी भी द्वार से प्रवेश कर जाते हैं और ये प्रवेश करके मनुष्य को बहुत क्लेश देते हैं। ये मल द्वार से, मूत्र द्वार से, नेत्र द्वार से ग्रहण इंद्री के द्वार से तरुणेंद्र के द्वार से, योगेंद्र से ये शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

अहम की वृत्ति में प्रेत (Ghost) जाकर अपना आवास बनाता है

जब किसी के शरीर में प्रवेश करते है तो इन का वास अहम की वृत्ति में होता है. अहम की वृत्ति में ये प्रेत जाकर के अपना आवास बना लेता है और वहीं से समस्त इंद्री आदि पर प्रशासन करता है। वो जैसा चाहता है वैसा व्यवहार उससे कराता है। वो इंद्रियों को अपने अनुसार चलता है.

कभी कभी कर्मों का भोग प्रकट होने पर एक शरीर में कई प्रेत आकर के वास करते हैं और उस शरीर को महान कष्ट देते हैं।

प्रेत (Ghost) सबको नहीं सताते

पर ये है कि भूत प्रेत सबको नहीं सताते। प्रेत स्वतंत्र नहीं कि वे किसी पर भी चढ़ गए और उसे क्लेश देने लगे. ये हर एक शरीर में प्रवेश नहीं हो सकते।

भगवान भूतेश्वर के कण्ट्रोल में रहते हैं भूत Ghost

भगवान भूतेश्वर के शासन में संपूर्ण सृष्टि के भूत रहते हैं और जब किसी जीव (मनुष्य) का वैसा कर्म बिगड़ जाता है तो उसको दंड देने के लिए भगवान भूतेश्वर छूट दे देते हैं तो वो प्रेत उस शरीर के ऊपर चढ जाता है। उस शरीर को वैसी ही बुद्धी दे दी जाती है।

भूत (Ghost) चढ़ने से पहले उस व्यक्ति के साथ ऐसा हो जाएगा

बुरी दशा आने के पहले उस मनुष्य की बुद्धि बदली जाती है. वो जाएगा पीपल के नीचे पेशाब कर देगा। वह मशान में संध्याकाल, मध्यान काल मध्यरात्रि में जाएगा या फिर संयोग से उसके कर्म के अधीन होकर के वो प्रेत उसके सामने आएगा, कोई ऐसी घटना घटेगी, वह अपवित्र होगा। वो उसके शरीर में चढकर उसे क्लेश प्रदान करेगा। पर ये पक्का समझ लीजिए कोई भी प्रेत स्वतंत्र नहीं है कि जब वो जिसको चाहे सता दे। आपका जब कर्म बिगडेगा, आप अपवित्र होंगे और ऊपर से भूतेश्वर का इशारा होगा तब वो भूत आकर के आपको दण्ड देगा।

किन पर चढ़ता है भूत (Ghost) ?

भूत योनी में जो जीव जाता है, वो जलता रहता है। उसके सामने चाहे जितने समुन्द्र नदी आये पर वो जल नहीं पी सकता। वृक्षों से फल नहीं खा सकता। दुकानों से भोजन उठाकर चक नहीं सकता, खा नहीं सकता वो भूखा प्यासा चिल्लाता रहता है. जब उस प्रेत के सामने कोई ऐसा पापात्मा, मलिन, अपवित्र, शरीरधारी आता है और ईश्वर का इशारा होता है, तब भूत उस गंदे कर्म वाले शरीरधारी पर आ जाता है फिर उस प्रेत को जो जल आदि मिलता है, उससे वो तृप्त होता है.

भूत (Ghost) को कब शरीर छोड़ना पड़ता है ?

मनुष्य का कोई बुरा कर्म का जो भोग आता है तभी इन प्रेत आत्माओं का सहयोग होता है। कर्मों का भोग जब तक बना रहता है तब तक उनके शरीर में रहते हैं। जहां उस शरीर धारी का भोग समाप्त होगा तब कोई ना कोई निमित्त बनेगा उस प्रेत को भागना पडेगा। ऐसा नहीं की प्रेत किसी शरीर पर बहुत काल तक बराबर रह सके। यदि रह रहा है तो कोई ना कोई कर्म भोग उसका है जो उसको निपटा रहा है।

जब महात्माओं के सामने प्रेत (Ghost) जाते है तो क्या होता है ?

भूत प्रेत कभी कभी संत महात्माओं के सामने भी देखे गए हैं। ये भूत प्रेतों का कर्म समाप्त होने का समय आता है। उनकी योनि समाप्त होने का समय आता है। तब वो संतों के समीप जाते हैं जो भजनानंद, भगवत्प्राप्ति महात्मा या भगवत्प्राप्ति की प्रबल लालसा वाले संतजन है। इनके दर्शन से इनके संभाषण से, उस भूत प्रेत के वो सारे कर्म जिसकी वजह से वे प्रेतयोनि बना था, वो सब नष्ट हो जाते हैं और वो मुक्त हो जाता है।

प्रेत (Ghost) ना सताए इसका उपाय

ऐसी अशुभ प्रेत योनिया तुम्हें कभी सताये ना इसके लिए बहुत सुंदर उपाय है। शास्त्र वेत्ता महापुरुष कहते हैं कि कई बार वृक्ष में कील लगा देते है ताकि कोई उसे निकाले तो उस पर भूत चढ़ जाए. या फिर किसी तांत्रिक ने बोतल जमीन में गाढ़ कर उसमें प्रेत डाला है तो यदि आप भगवत शरणागत है, गले में कंठी है, तिलक लगाए हुए नाम जप कर रहे हैं तो अगर उस वृक्ष से किल या बोतल उखाडेंगे तो आपके ऊपर कोई आक्रमण प्रेतयोनि नहीं करेगी। प्रेत आत्मा प्रकट भले हो जाए उसकी इतनी सामर्थ्य नहीं तो वो आपका स्पर्श कर सके।

प्रेत योनी भी जब आक्रमण करती है जब आप अपवित्र होंगे, मुहं झूठा होगा, आप भगवत विस्मरण होंगे। गले में कंठी नहीं होगी, आप भगवद् आश्रित नहीं होंगे तभी ऐसा होता है।

जब एक व्यक्ति के सामने भूत (Ghost) आ गया

एक प्रातःकालीन वेला पर घूमने गए थे तो एक प्रेत सामने भयानक रूप से प्रकट हुआ तो घबरा गए। वो खुद डरके गिर गए। प्रेत ने उनका स्पर्श नहीं किया। प्रेत थोडी देर खडा रहा वो उनसे कुछ बोले नहीं और चल पड़े, प्रेत ने रोका भी नहीं. वह बाद में संतों से मिले, बातचीत की, संतो ने बताया की गले में तुम कण्ठी पहने थे। कुछ नियम भजन का करते थे इसलिए किसी की ताकत नहीं कि तुम्हें छू सके। भगवन्नाम में, भजन में बडी सामर्थ है।

यदि किसी को ऐसा लग रहा हो कि उसे प्रेत बाधा सता रही है, प्रेतबाधा क्लेश दे रही है, किसी को भी तो एक बहुत सहज उपाय है। हमारे शास्त्र वेत्ता महापुरुषों ने वर्णन किया है यदि हम भगवत शरण अरविंद का आश्रय ले ले और ये वचन बिल्कुल पक्के विश्वासपूर्वक मान ले। यदि श्रीमद्भागवत महापुराण का उसको श्रवण कराया जाए। अगर आप संस्कृत का ज्ञान रखते हैं तो अच्छा नहीं तो किसी विद्वान के द्वारा सुन ले.

पक्का समझ लो, प्रेत का भी उद्धार हो जाएगा और जिसके शरीर प्रेत आया होगा वो प्रेत बाधा से मुक्त हो जाएगा। करोडों जन्मों के पापों का स्वरुप खत्म होगा. यह श्री कृष्ण का आशीर्वाद है। अर्थ सहित भागवत का श्रवण या कथन करने से करोडों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और निश्चित निश्चित उस प्रेत का भी उद्धार हो जाएगा और जिसके ऊपर प्रेत आया है वो भी प्रेतबाधा से मुक्त हो जाएगा।

देखो धुंधकारी अपने गंदे कर्मों की वजह से भयानक प्रेत बन गया था, जब उनके भाई गो करण जी ने श्रीमद्भागवत कथा उसे श्रवण कराई तो सात दिनों में सूखे बांस कि गांठ में बैठा हुआ था। गांठे फट गई और भगवत पार्षद हो गया, उससे कोई साधना नहीं हुई। उसने केवल श्रीमद्भागवत का श्रवण किया तो वो भगवत स्वरूप होकर दिव्य विमान पर बैठकर भगवद्धाम को गया।

इस एक श्लोक को याद कर ले प्रेत (Ghost) टिक नहीं सकता

जो पुरुष एक श्लोक भागवत का याद कर ले. अगर संस्कृत का ज्ञान नहीं है तो एक श्लोक “कृष्णाय वासुदेवाय हरे परमात्मने प्रणत क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम: आधा ही श्लोक बोल दे. आपके चाहे जितना भयानक प्रेत टिकेगा नहीं. श्री कृष्ण का स्वरूप महामंत्र स्वरुप श्रीमद्भागवत है। इस श्लोक का यदि आप उच्चारण करते हैं तो राजस्वी अश्वमेध यज्ञ का फल स्वाभाविक आपको प्राप्त हो जाता है। कोई भय आपके सामने टिक नहीं सकता। कोई बंधन आपको बांध नहीं सकता। आप उच्चारण करके देखिए, आप कंटस्थ करके तो देखिए।

प्रेत (Ghost) ना छुए तो ऐसा करे

जो व्यक्ति श्रीमद्भागवत के श्लोक, श्री ठाकुरजी की सेवा, उनका चिंतन. श्री प्रिया प्रीतम् की सेवा, राधा नाम की सेवा, ठाकुर सेवा, शाली ग्राम सेवा इन का चिंतन या तुलसी जी का सिंचन, तुलसी जी की आरती, तुलसी जी की सेवा, गौ माता की सेवा ये जो करता है तो कभी उसे कोई बाधा परास्त नहीं कर सकती। प्रेतादि तो स्पर्श ही नहीं कर सकते। जो ठाकुर सेवा करते हैं, गले में तुलसी धारण करते हैं, श्रीमद्भागवत श्लोक याद किए हुए हैं और जो हरी चिंतन करते हैं. गौ को ग्रास देते, चारा देते सेवा कर रहे ऐसे पुरुषों को प्रेत छू नहीं सकते। हाँ अपना उद्धार कराने के लिए प्रेत सामने प्रकट हो सकते हैं।

यदि किसी का शरीर पूरा हो रहा हो और आप उसको भागवत श्लोक सुना दे तो वो सीधे प्रभु के धाम को जाएगा। बड़ी महिमा है। गोपाल सहस्त्रनाम, विष्णु सहस्त्रनाम, हनुमान चालीसा, श्रीमद्भागवत के श्लोक भगवन्नाम कीर्तन है. ये महा महिमा मय साधन है। कोई भी भूत, प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस ये आपका स्पष्ट नहीं कर सकते। इसलिए जीवन का परम लाभ श्रीहरि चरणों का आश्रय लेकर शरीर को पवित्र रखो, भगवन्नाम चिंतन करो, शास्त्रविहित कर्म करो। सबको सुख पहुँचाने की चेष्टा करो तो ये जो दुर्गति है इससे बच जाओगे। तो महान क्लेश देने वाले घातक अशुभ विनायक है। इनसे आप बच जाओगे। खूब नाम कीर्तन करो प्रभु के आश्रित रहो, यही जीवन का परमानंद है. राधावल्लभ लाल की जय

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