मोबाइल पर कुछ क्लिक और शेयर बाजार में सौदा पूरा। कम ब्रोकरेज, आसान ऐप और जल्दी पैसा कमाने की उम्मीद ने बाजार तक पहुंच तो बढ़ाई, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के लिए यह रास्ता कमाई के बजाय नुकसान का कारण बना। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी की सितंबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच इक्विटी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस—एफएंडओ—में कारोबार करने वाले 93 प्रतिशत व्यक्तिगत ट्रेडरों को नुकसान हुआ। तीन वर्षों में उनका कुल शुद्ध नुकसान 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह किसी सोशल मीडिया पोस्ट का दावा नहीं, बाजार नियामक का अध्ययन है।[sebi.gov]
इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं कि लोगों ने जोखिम क्यों लिया। सवाल जवाबदेही का है: जब बाजार तक पहुंच देने वाला कारोबार फलता-फूलता है, लेकिन उसके अधिकांश व्यक्तिगत ग्राहक घाटे में रहते हैं, तो कारोबारी सफलता को किस कसौटी पर परखा जाना चाहिए?
यह लेख किसी ब्रोकर मालिक का नाम लिए बिना इसी सवाल की पड़ताल करता है। एक जरूरी सीमा भी है: उपलब्ध अध्ययन बड़े पैमाने पर नुकसान साबित करते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि हर नुकसान किसी डिस्काउंट ब्रोकर ने कराया या हर कंपनी ने जानबूझकर ग्राहकों को गलत रास्ते पर लगाया।
पहले फर्क समझें: निवेश और रोज की बाजी एक बात नहीं
किसी कंपनी के शेयर खरीदकर लंबे समय तक रखना, उसी दिन शेयर खरीदना-बेचना और एफएंडओ में सौदे करना—तीनों को एक ही तरह का “शेयर बाजार निवेश” कहना गलत तस्वीर बनाता है।
शेयर खरीदने पर व्यक्ति किसी कारोबार में हिस्सेदारी लेता है। एफएंडओ ऐसे वित्तीय अनुबंध हैं जिनकी कीमत किसी शेयर या सूचकांक जैसी दूसरी संपत्ति से जुड़ी होती है। इनमें कम पूंजी के मुकाबले बड़ा दांव लग सकता है। इसलिए बाजार की छोटी हलचल भी पूंजी पर बड़ा असर डाल सकती है। विकल्प यानी ऑप्शन खरीदने वाले के लिए सिर्फ बाजार की दिशा सही पकड़ना काफी नहीं; कीमत को सही समय में पर्याप्त दूरी तक बढ़ना या गिरना भी जरूरी हो सकता है।[bbc.co][business-standard]
इसलिए एफएंडओ के नुकसान के आंकड़ों को सभी दीर्घकालीन शेयर निवेशकों का परिणाम मानना ठीक नहीं। लेकिन इन्हें महज कुछ लापरवाह लोगों की निजी गलती बताकर टालना भी मुश्किल है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
| अवधि और अध्ययन | प्रमुख नतीजा |
|---|---|
| वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24; सेबी, सितंबर 2024 | 93 प्रतिशत व्यक्तिगत एफएंडओ ट्रेडरों को नुकसान; कुल शुद्ध नुकसान 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक। [sebi.gov] |
| वित्त वर्ष 2024-25; सेबी का जुलाई 2025 अध्ययन | लगभग 91 प्रतिशत व्यक्तिगत ट्रेडर घाटे में; कुल शुद्ध नुकसान 1,05,603 करोड़ रुपये। अध्ययन में शीर्ष 13 ब्रोकरों के करीब 96 लाख विशिष्ट ट्रेडर शामिल थे। [sebi.gov][reuters] |
| वित्त वर्ष 2025-26; सेबी, 20 अगस्त 2026 | 87.7 प्रतिशत व्यक्तिगत ट्रेडर घाटे में; कुल शुद्ध नुकसान लगभग 91,685 करोड़ रुपये। [sebi.gov] |
| वित्त वर्ष 2022-23 में शेयरों की इंट्राडे ट्रेडिंग; सेबी, जुलाई 2024 | 71 प्रतिशत व्यक्तिगत ट्रेडरों को शुद्ध नुकसान। साल में 500 से अधिक सौदे करने वालों में नुकसान उठाने वालों का अनुपात 80 प्रतिशत था। [sebi.gov][newindianexpress] |
इन आंकड़ों को पढ़ते समय एक सावधानी जरूरी है। अगस्त 2026 की नई रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 का तुलनात्मक नुकसान संशोधित होकर लगभग 1.12 लाख करोड़ रुपये बताया गया है; जुलाई 2025 के अध्ययन में यह 1,05,603 करोड़ रुपये था। इसलिए अलग-अलग रिपोर्टों के आंकड़े जोड़कर सनसनीखेज कुल बनाना या उन्हें बिना स्पष्टीकरण सीधे मिलाना उचित नहीं है।[business-standard][sebi.gov][sebi.gov]
नई रिपोर्ट में कुल नुकसान घटना राहत की बात है। लेकिन उसी रिपोर्ट के अनुसार सक्रिय व्यक्तिगत ट्रेडरों की संख्या भी करीब 20 प्रतिशत घटकर 98.1 लाख से 78.6 लाख रह गई। यानी कम कुल नुकसान को अपने-आप यह प्रमाण नहीं मान सकते कि बचे हुए लोगों के लिए ट्रेडिंग आसान या सुरक्षित हो गई। लगभग हर दस में नौ ट्रेडर अब भी घाटे में थे।[sebi.gov]
केस स्टडी 1: छोटे पोर्टफोलियो, बड़े दांव
स्रोत: सेबी की अगस्त 2026 की दो अध्ययन रिपोर्टें
सेबी के 20 अगस्त 2026 के निष्कर्ष इस बहस को घर-परिवार की बचत से जोड़ते हैं। मुनाफे और नुकसान का अध्ययन शीर्ष 15 ब्रोकरों के आंकड़ों पर आधारित था, जो इस बाजार के लगभग 90 प्रतिशत व्यक्तिगत निवेशकों का प्रतिनिधित्व करते थे। व्यवहार संबंधी अध्ययन में मुख्य रूप से 5,000 ट्रेडरों के यादृच्छिक नमूने का इस्तेमाल किया गया।[sebi.gov]
नतीजे गंभीर हैं:
- लगभग 35 प्रतिशत व्यक्तिगत डेरिवेटिव ट्रेडरों के पास इक्विटी होल्डिंग नहीं थी।
- करीब 78 प्रतिशत का इक्विटी पोर्टफोलियो एक लाख रुपये से कम था।
- एक लाख रुपये से कम पोर्टफोलियो वाले ट्रेडरों ने लगभग आधा कारोबार किया, लेकिन कुल नुकसान का करीब 70 प्रतिशत उन्हीं के हिस्से आया।
- व्यक्तिगत ट्रेडरों के कुल नुकसान का लगभग 92 प्रतिशत ऑप्शंस कारोबार से आया।[sebi.gov]
यहां “इक्विटी पोर्टफोलियो” का मतलब पूरी घरेलू संपत्ति नहीं है। सेबी की परिभाषा में इसमें डीमैट रूप में रखे शेयर और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड शामिल हैं। इसलिए इन आंकड़ों से किसी परिवार की कुल आर्थिक स्थिति तय नहीं की जा सकती। फिर भी अध्ययन का संकेत साफ है: छोटा निवेश आधार रखने वाले लोगों पर नुकसान का बोझ अनुपात से अधिक पड़ा।[sebi.gov]
इसी अध्ययन में कम उम्र, कम आय और छोटे पोर्टफोलियो वाले ट्रेडरों में अपने आर्थिक संसाधनों के मुकाबले अधिक आक्रामक कारोबार दिखाई दिया। यह आसान पहुंच और समझदारी भरे इस्तेमाल के बीच की दूरी है।[sebi.gov]
केस स्टडी 2: नुकसान के बाद भी वापसी—“इस बार भरपाई हो जाएगी”
स्रोत: सेबी का “Trading Behaviour of Individual Traders” अध्ययन, अगस्त 2026
ट्रेडिंग की सबसे खतरनाक अवस्था वह हो सकती है जब अगला सौदा कमाई के लिए नहीं, पिछला नुकसान वापस पाने के लिए किया जाए।
सेबी के अध्ययन में लगातार दो साल नुकसान उठाने के बाद भी कारोबार जारी रखने वाले ट्रेडरों में लगभग 90 प्रतिशत को अगले साल फिर नुकसान हुआ। कई वर्षों का अनुभव रखने वालों में भी नुकसान की दर ऊंची रही; केवल ज्यादा समय तक बाजार में बने रहना बेहतर परिणाम से जुड़ा नहीं मिला।[sebi.gov]
जिन ट्रेडरों के कुछ तिमाही परिणाम मुनाफे वाले और कुछ नुकसान वाले थे, उनमें लगभग 79 प्रतिशत का औसत मुनाफा उनकी औसत हानि से छोटा था। यानी बीच-बीच की जीत, कुल आर्थिक नुकसान को छिपा सकती है।[sebi.gov]
इन निष्कर्षों को हर व्यक्ति में चिकित्सकीय “लत” का प्रमाण नहीं कहा जा सकता। लेकिन ये उस व्यवहार का ठोस संकेत हैं जिसमें बार-बार नुकसान होने पर भी अगली जीत की उम्मीद आदमी को बाजार में टिकाए रखती है।
केस स्टडी 3: एक दिन में करीब 7,000 डॉलर का नुकसान
स्रोत: बीबीसी न्यूज़ की 17 जुलाई 2025 की रिपोर्ट
बीबीसी की पत्रकार देविना गुप्ता की रिपोर्ट, “Why Jane Street, a US trading giant, is in trouble in India”, में मुंबई के एक निवेशक ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि 17 जनवरी 2024 को उसे करीब 7,000 डॉलर का नुकसान हुआ। उसके मुताबिक, यह उस साल का उसका सबसे खराब कारोबारी दिन था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सेबी ने उसी तारीख को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग फर्म के बेहद लाभकारी कारोबार का उल्लेख किया था।[bbc.co]
यह मामला साधारण ट्रेडर और तकनीकी रूप से मजबूत संस्थागत खिलाड़ी के बीच असमानता दिखाता है। लेकिन इसकी सीमा उतनी ही महत्वपूर्ण है: उस निवेशक के नुकसान को उस फर्म के किसी खास सौदे का सीधा परिणाम साबित नहीं किया गया था। बीबीसी ने भी स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत निवेशकों का समूचा नुकसान उस फर्म से सीधे नहीं जोड़ा जा सकता। संबंधित फर्म ने गलत काम के आरोपों से इनकार किया था।[bbc.co]
इस प्रकाशित मामले को यहां बाजार की बनावट और निगरानी के सवाल समझाने के लिए लिया गया है—किसी डिस्काउंट ब्रोकर की दोषसिद्धि के रूप में नहीं।
सस्ती ब्रोकरेज का मतलब सस्ती गलती नहीं
डिस्काउंट ब्रोकिंग पर गंभीर सवाल यह नहीं होना चाहिए कि उसने बाजार में प्रवेश सस्ता क्यों किया। असली सवाल यह है कि बार-बार सौदा करने की सुविधा और उससे पैदा होने वाले खर्च को ग्राहक कितना समझ पाया।
सेबी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में व्यक्तिगत ट्रेडरों ने लगभग 25,000 करोड़ रुपये लेनदेन खर्च में दिए। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान ऐसे खर्च लगभग एक लाख करोड़ रुपये रहे। अध्ययन ने यह भी कहा कि कारोबार में नरमी के बावजूद बढ़े हुए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी के कारण कुल लेनदेन खर्च मोटे तौर पर पहले जैसे बने रहे।[sebi.gov]
यह पूरा पैसा ब्रोकर का मुनाफा नहीं है। लेनदेन खर्च में कर और अन्य शुल्क भी शामिल होते हैं। इसलिए “लोगों का सारा नुकसान ब्रोकरों की जेब में गया” कहना गलत होगा। ब्रोकर के शुल्क, सरकारी कर और बाजार में दूसरे पक्ष का कारोबारी लाभ अलग-अलग चीजें हैं।[business-standard][sebi.gov]
फिर भी हितों के टकराव का सवाल बना रहता है: जहां कंपनी की आय सौदों से जुड़ी हो, वहां ग्राहक का अधिक कारोबार करना कंपनी के लिए लाभकारी हो सकता है—भले ही ग्राहक के अपने परिणाम खराब हों। इसीलिए ग्राहक की गतिविधि के साथ उसकी आर्थिक हालत और नतीजों को भी जवाबदेही की कसौटी बनाना जरूरी है।
चमकते मालिक, पेज-थ्री तस्वीरें और अधूरी पत्रकारिता
ब्रोकर मालिकों की दौलत, उनकी जीवनशैली या बड़े उद्योगपतियों और सरकारी हस्तियों के साथ तस्वीरों को देखकर कंपनी की ग्राहक-सुरक्षा का फैसला नहीं किया जा सकता। ऐसी तस्वीरें न निवेश कौशल का प्रमाण हैं, न सरकारी गारंटी, न किसी गलत काम का सबूत।
यहां पत्रकारिता के लिए सवाल बनता है: कारोबारी सफलता की कहानी में ग्राहक का अनुभव कहां है?
किसी भी वित्तीय मंच पर रिपोर्टिंग करते समय दौलत और लोकप्रियता के साथ ये सवाल भी पूछे जाने चाहिए:
- कंपनी के कितने सक्रिय व्यक्तिगत एफएंडओ ग्राहक शुद्ध मुनाफे में हैं?
- क्या जोखिम की चेतावनी उतनी ही साफ दिखाई जाती है जितनी ट्रेड करने की सुविधा?
- बार-बार घाटा उठाने वाले ग्राहक को रुकने और अपना कुल परिणाम देखने के लिए क्या व्यवस्था है?
- ग्राहक को कर और शुल्क समेत वास्तविक कमाई या नुकसान कितनी आसानी से समझ आता है?
- ग्राहक शिक्षा में दीर्घकालीन निवेश और ट्रेडिंग का फर्क कितनी स्पष्टता से बताया जाता है?
ये जांच के प्रश्न हैं, किसी अनाम मालिक पर साबित आरोप नहीं। उपलब्ध स्रोतों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी खास व्यक्ति ने जानबूझकर लोगों की बचत बर्बाद कर अपनी संपत्ति बनाई।
तीन विशेषज्ञों की राय
नीचे दिए विचार पहले से प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित हैं, इस लेख के लिए लिए गए नए साक्षात्कार नहीं हैं। पदनाम संबंधित रिपोर्ट के समय के हैं।
1. विनीत बोलिंजकर — शोध प्रमुख, वेंचुरा
बिजनेस स्टैंडर्ड की 26 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में बोलिंजकर ने बताया कि डेरिवेटिव में वास्तविक पूंजी से कई गुना बड़ा जोखिम लिया जा सकता है। इससे बाजार की अपेक्षाकृत छोटी चाल भी बड़ा नुकसान बना सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिक कारोबार वाली रणनीतियों में लेनदेन खर्च, शुरुआती कारोबारी परिणाम और अंत में मिलने वाले वास्तविक रिटर्न के बीच अंतर बढ़ा देते हैं।[business-standard]
सरल अर्थ: सस्ता सौदा भी बार-बार करने पर महंगा पड़ सकता है।
2. मेहुल कोठारी — डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट, आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स
इसी रिपोर्ट में कोठारी के अनुसार कई छोटे ट्रेडर तय रणनीति के बजाय बाजार की छोटी अवधि की हलचल देखकर सौदे करते हैं। कम उम्र, कम आय और छोटे पोर्टफोलियो वाले लोगों में अपनी पूंजी के मुकाबले अधिक जोखिम लेने और अधिक बार ट्रेड करने की प्रवृत्ति दिखाई देती है।[business-standard]
सरल अर्थ: बाजार में प्रवेश करना आसान है; अपनी आर्थिक क्षमता के भीतर रहकर कारोबार करना कठिन।
3. शिल्पा राउत — वरिष्ठ विश्लेषक, डेरिवेटिव्स, पीएल कैपिटल
राउत ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि बचत निकालकर ट्रेडिंग करना, नुकसान या मार्जिन पूरा करने के लिए उधार लेना और घाटा वापस पाने के लिए मजबूरी महसूस करते हुए सौदे करना स्पष्ट चेतावनी संकेत हैं। उन्होंने सोशल मीडिया की टिप्स और “पक्के” कॉल पर आंख बंद करके भरोसा करने से भी बचने को कहा।[business-standard]
सरल अर्थ: जब ट्रेडिंग घर की जरूरतों और बचत में हाथ डालने लगे, तब सवाल अगली रणनीति का नहीं, नुकसान रोकने का होता है।
क्या म्यूचुअल फंड बेहतर रास्ता हो सकते थे?
बहुत से नए निवेशकों के लिए रोज के सौदों के बजाय अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार म्यूचुअल फंड या विविध शेयर निवेश जैसा सरल रास्ता अधिक उपयुक्त हो सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट भी लगातार नुकसान की स्थिति में डेरिवेटिव से हटकर ऐसे सरल, बिना उधार-आधारित बड़े जोखिम वाले विकल्पों की ओर जाने की बात करती है।[business-standard]
लेकिन “विशेषज्ञ पैसा संभाल रहा है, इसलिए नुकसान नहीं होगा”—यह भी गलत भरोसा है। अलग-अलग संपत्तियों में पैसा बांटना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है, पर नुकसान से सुरक्षा या मुनाफे की गारंटी नहीं देता। म्यूचुअल फंड उद्योग की संस्था एएमएफआई की निवेशक-शिक्षा सामग्री भी यही स्पष्ट करती है।[mutualfundssahihai]
इसलिए म्यूचुअल फंड को एफएंडओ के मुकाबले “पक्का मुनाफा” बताना एक भ्रम की जगह दूसरा भ्रम रखना होगा। जरूरी फर्क है—वित्तीय लक्ष्य के लिए निवेश करना और जल्दी कमाने के लिए लगातार दांव लगाना।
सुधार का पैमाना: कारोबार नहीं, ग्राहक का परिणाम
नियामकीय सख्ती के बाद भागीदारी और कुल नुकसान में गिरावट दिखना महत्वपूर्ण है। लेकिन लगभग 88 प्रतिशत व्यक्तिगत ट्रेडरों का घाटे में रहना बताता है कि समस्या समाप्त नहीं हुई है। सेबी के नवीनतम अध्ययन में ट्रेडिंग की अधिक तीव्रता—यानी उपलब्ध पूंजी के मुकाबले ज्यादा कारोबार—खराब परिणामों से जुड़ी मिली।[sebi.gov]
इस आधार पर जवाबदेही की दिशा स्पष्ट होनी चाहिए:
- ग्राहक को उसके वास्तविक, कर और शुल्क के बाद के परिणाम आसानी से दिखें।
- लगातार नुकसान और बढ़ती कारोबारी तीव्रता पर प्रभावी चेतावनी मिले।
- प्रचार में संभावित कमाई के साथ वास्तविक नुकसान की तस्वीर भी स्पष्ट हो।
- वित्तीय पत्रकारिता कारोबारी संपत्ति के साथ ग्राहक-हित की भी जांच करे।
- निवेशक शिक्षा का उद्देश्य केवल ऐप चलाना सिखाना नहीं, यह समझाना हो कि कब सौदा नहीं करना चाहिए।
बाजार तक पहुंच बढ़ाना उपलब्धि है। लेकिन उस उपलब्धि की पूरी कहानी तभी लिखी जाएगी, जब चमकते मंचों पर मालिकों की सफलता के साथ उन साधारण लोगों का हिसाब भी रखा जाए, जिनके लिए “जल्दी कमाई” का सपना मेहनत की बचत खोने में बदल गया।





