2026 में भाई ये जेन जी यानी टीनेजर्स और जवान लड़के लड़कियों को समझाना मुश्किल है. माँ बाप तो इनके तेजी से बदलते स्विन्गिंग मूड से परेशान हैं, अब सरकार को भी इनके मूड का सामना करना पड़ रहा है. 35-40 से ऊपर के लोगों को फ़िक्र होती है. वो डरते हैं. लेकिन ये नहीं डरते. माता पिता से बिलकुल नहीं डरते तो सरकार से क्या डरेंगे.
सरकार का सिस्टम बहुत खराब है, जंग लगा हुआ है. सड़ गया है. इसके खिलाफ अधिक उम्र और शादीशुदा व्यक्ति के बोलना तो दूर इसे बदलने की बात भी करना उसे मरने जैसा लगता है.
दूसरी तरफ टीनेजर्स जैसे माँ बाप की पिटाई के बाद इनकी जिद और बढ़ जाती है, वैसे ही 20 जुलाई को पुलिस से पिटने के बाद ये और जिद्दी हो गए हैं. टीनेजर्स आगे की कहाँ सोचता है, वो तो आज नहीं अभी में जीता है. कल किसने देखा है, वे अभी मजा लेना चाहता है.
उद्दंड टाइप के टीनेजेर्स
वो टीनेजेर्स ज्यादा खतरनाक होते हैं, जो उद्दंड टाइप के होते हैं. बात नहीं मानते. पढ़ाई में मन नहीं लगता. जिन्हें रोज कुछ नया नया चाहिए. और शायद ऐसे भी टीनेजर्स जिन्होंने जो माँगा, उनके माँ बाप ने आसानी से दे दिया है.
सिस्टम की गन्दगी पर ज्यादा उम्र वाले आपसी बहस में ही उलझकर अपनी भड़ास निकाल लेते है, पर टीनेजर्स सुनते सुनते रहते हैं और ग्राउंड पर आकर भड़ास निकालने की हिम्मत रखते हैं. अभिजीत दिपके ने अपने अभियान में इन्हीं टाइप के टीनेजर्स पर फोकस किया है. टीनेजर्स को कॉकरोच शब्द जबरदस्त लगा. दिपके और उनकी टीम के सोशल मीडिया पर वायरल होने और करीब एक महीने जंतर मंतर पर जमने के बाद अब बड़ी संख्या में टीनेजर्स को इनके बैनर के साथ जंतर मंतर में जुटकर मजा आने लगा है.
इन्स्टा के जरिये प्रधान के इस्तीफे का दबाव
जंतर मंतर ही नहीं देशभर में टीनेजर्स मजे लेने जुट रहे हैं. भले मीडिया में आन्दोलन जैसे शब्द इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन इनके लिए यह एक मजा है और इस मजे को बढाने में इनको मोबाइल देवता का पूरा साथ मिल रहा है. धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की बात इनके दिमाग में घुस गई है. इन्स्टा के जरिये ये प्रधान का इस्तीफ़ा लेने का सरकार पर दबाव बना रहे हैं. जिसका ज्यादा असर होता है, क्योंकि 35-40 से ऊपर वाले जो ग्राउंड पर जाने से कतराते हैं, वो इन्स्टा के जरिये अपनी सोच तैयार करते है और उसी हिसाब से अपने वोट का इस्तेमाल कर सकते हैं. सरकार को इसी का डर है.
मोदी सरकार के चतुर बनाम टीनेजर्स की फ़ौज
मोदी सरकार में हालांकि चतुर खिलाड़ी बैठे हैं, जो इनके धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं. चतुर खिलाडियों को लग रहा है कि मीटिंग मीटिंग खेलने के बाद कॉक्रोचो को थका देंगे और सख्त कानून और नियम बनाकर मामले को सुलटा लेंगे. पर दिपके की बात टीनेजेर्स सुन रहे हैं. sonam वांगचुक और दिपके ने 20 जुलाई का एलान किया और 24 को देशभर में धरनों का एलान किया, जिन्हें टीनेजेर्स ने अंजाम तक पहुंचाया.
किसान आन्दोलन पर सरकार के चतुरों ने क्या किया था ?
इससे पहले किसानों का आन्दोलन एक साल तक चला था, किसानो से भी मीटिंग चलती रही. किसानों को एक साल धरने पर बैठाने के बाद पीएम मोदी ने कृषि कानून वापस ले लिए और किसानो को आन्दोलन खत्म करने के लिए एक सम्मान जनक रास्ता मिल गया. किसानो ने दम तो दिखाया था, लेकिन एक साल तक प्रमुख सड़कों को जाम करने के बाद आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. आम लोगों ने किसानों को जमकर कोसा था. इसलिए किसानों के लिए आन्दोलन को आगे चलाना इतना आसान नहीं रह गया था. भले मोदी सरकार ने किसान कानून वापस लिए लेकिन उसकी चुनावी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा. किसान आन्दोलन के ठीक बाद भाजपा ने उत्तर प्रदेश चुनाव जीता. किसान नेताओं ने चुनाव में भाजपा के खिलाफ ताल ठोंकी लेकिन आम किसानों ने भाजपा का साथ दिया.
अब 2026 में भी सरकार दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद कर रही है. सडको पर जाम है. कनाट प्लेस मार्किट बंद है. लोग परेशान है. अभी एक महीने हुए है और पिछले एक हफ्ते से ही ज्यादा टीनेजर्स जुटे हैं. पहले के दिनों में कम थे. sonam को पुलिस के उठाने के बाद ही टीनेजेर्स मजा लेने पहुँच रहा हैं. धरना ज्यादा खींचेगा तो आम लोग और खासकर बाकी टीनेजर्स जो अभी धरने से दूर है वो रोड जाम होने से चिड़ेंगे. सरकार के चतुर भी शायद ऐसा चाहते हैं कि लोग कॉक्रोचो से चिढ़े.
240 सांसदों वाली सरकार के लिए इगो बड़ी बात
मोदी सरकार के लिए इस्तीफे की मांग को मानना मुश्किल है. 240 सांसदों वाली सरकार के लिए ये एक अहम की बात होती है. सरकार के चतुर खिलाड़ी शायद सोच रहे है कि जब हमारे सहयोगी नीतीश और चंद्रबाबू से कोई डर नहीं है तो क्यों घुटने टेंकने. इसलिए मीटिंग मीटिंग खेलते रहो. पर टीनेजेर्स में बहुत एनेर्जी है और जहां उनको लगता है कि यहाँ मजा aa रहा है, वो मजा लेने की कोई कसर नहीं छोड़ते. अभी सरकार और भाजपा सीजेपी के लोगों के साथ अच्छी तरह पेश हो रही है. भले धरनों पर सरकार के खिलाफ गंदे शब्दों के नारों की बाढ़ aa रही है. लेकिन सरकार सब्र रख रही है. अभी सरकार ने अपने चिल्लाने और उधम करने वाले नेताओं को सिग्नल नहीं दिया है. पर कॉक्रोचों और सर्कार व भाजपा भिड़ने का समय भी आएगा. क्योंकि मीटिंग के साथ साथ तू तू मैं मैं भी चलती है. खैर मामला कुछ महीने तो चलेगा. हो सकता है 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तक चले.








