म्यूच्यूअल फण्ड : 30-35 साल में हजारो से बने करोड़ो

अगर आपने 1990 में बस 1 लाख रुपये कुछ चुने हुए म्यूचुअल फंड्स में लगाए होते, तो आज वही रकम 40–60 लाख रुपये के बीच होती, और अगर 35 साल तक SIP की होती तो आप आसानी से करोड़ों की रकम देख रहे होते।


1. पिछले 30–35 साल में किस फंड ने क्या कमाल किया (उदाहरण)

यहाँ हम कुछ ऐसे फंड ले रहे हैं जिनकी उम्र 25–35 साल या उससे ज़्यादा है, ताकि आपको सच में “लाइफ़टाइम” कम्पाउंडिंग का स्वाद मिल सके।torusdigital+2

चुने हुए फंड (कैटेगरी के हिसाब से)

  • लार्ज कैप / फ्लेक्सी कैप
    • UTI Mastershare Fund – 1986 से, लार्ज कैप।bajajbroking+1
    • UTI Flexi Cap Fund – 1992 से, फ्लेक्सी कैप (मल्टी कैप जैसा)।[torusdigital]​
    • Franklin India Bluechip Fund – 1993 से, लार्ज कैप।upstox+1
  • मिड कैप
    • Franklin India Prima Fund – 1993 से, मिड कैप।upstox+1
  • स्मॉल कैप (इतने पुराने नहीं, पर 10–15 साल की जबरदस्त कहानी)
    • Nippon India Small Cap Fund – 2010 से, CAGR लगभग 21% के आसपास।[angelone]​
    • SBI Small Cap Fund – 2009 से, CAGR लगभग 20–21% के आसपास।[angelone]​

ऊपर वाले फंड्स की लम्बी अवधि की वार्षिक औसत रिटर्न (CAGR) broadly इस रेंज में रही है: लार्ज/फ्लेक्सी/मिड कैप के पुराने फंड लगभग 13–15% के आस‑पास; कुछ स्मॉल कैप हाल की 10 साल की अवधि में 20% से ज़्यादा।bajajbroking+3


2. 35 साल में 1 लाख कितने बने होते? (आसान कैलकुलेशन)

माने कि किसी अच्छे लार्ज/फ्लेक्सी/मिड कैप फंड ने लगभग 14% सालाना CAGR दिया (UTI Mastershare, Franklin Bluechip जैसे फंड्स की लम्बी अवधि की रिटर्न इससे मिलती‑जुलती रही है)।torusdigital+2

केस 1: 1,00,000 की एकमुश्त रकम, 35 साल के लिए

हम मोटे तौर पर ये मान लेते हैं:

  • अनुमानित CAGR: 14% सालाना (कंज़रवेटिव, क्योंकि स्मॉल/मिड कुछ समय में इससे ज़्यादा भी हुए हैं)।upstox+3
  • अवधि: 35 साल।

लम्प‑सम वैल्यू की फॉर्मूला है:
अंतिम रकम = शुरुआती रकम × (1+r)n(1 + r)^{n}(1+r)n

जहाँ r=0.14r = 0.14r=0.14 और n=35n = 35n=35 है।bajajbroking+2

लगभग अनुमान के लिए:

  • (1.14)10≈3.7(1.14)^{10} ≈ 3.7(1.14)10≈3.7
  • (1.14)20≈13.7(1.14)^{20} ≈ 13.7(1.14)20≈13.7
  • (1.14)35≈58–60(1.14)^{35} ≈ 58–60(1.14)35≈58–60 के बीच (लॉन्ग‑टर्म कम्पाउंडिंग एस्टिमेट)।

तो:

  • 1,00,000 × 58 ≈ 58,00,000 रुपये (लगभग 58 लाख)।

यानी, अगर आपने 1990 में 1 लाख UTI Mastershare या किसी इसी तरह के अच्छे लार्ज कैप/फ्लेक्सी कैप फंड में लगा दिए होते, तो आज वह लगभग 50–60 लाख के बीच हो सकता था (रेंज समझाने के लिए है, हर फंड में फर्क होगा)।torusdigital+2

केस 2: 10,000 रुपये की SIP, 30 साल तक

मान लीजिए आपने 1995–2025 के 30 साल तक हर महीने 10,000 रुपये किसी अच्छे इक्विटी फंड में SIP से लगाए और औसतन 12% CAGR मिला (कई विश्लेषणों में 10,000 की SIP ने 25 साल में 1 करोड़ से ज़्यादा बनाया है, यह डेटा उपलब्ध है)।translate.google+1

SIP की फॉर्मूला (लगभग) इस प्रकार है:
कुल वैल्यू ≈ मंथली रकम × (1+r)n−1r\frac{(1 + r)^{n} – 1}{r}r(1+r)n−1

यहाँ rrr = मासिक रिटर्न ≈ 12%/12 = 1% और nnn = 30 साल × 12 = 360।

  • (1.01)360≈35–40(1.01)^{360} ≈ 35–40(1.01)360≈35–40 के आस‑पास (एस्टिमेट)।
  • (1.01)360−10.01≈3400–3900\frac{(1.01)^{360} – 1}{0.01} ≈ 3400–39000.01(1.01)360−1≈3400–3900 (मोटा‑मोटी फैक्टर)।

तो:

  • 10,000 × 3,500 ≈ 3,50,00,000 रुपये (लगभग 3.5 करोड़)।

अलग‑अलग रिपोर्ट्स में 25 साल की 10,000 SIP, 12% पर लगभग 1 करोड़ से ऊपर दिखती है, 30 साल में ये 2.5–3.5 करोड़ तक जा सकती है, यह कम्पाउंडिंग की ताकत है।translate.google+1


3. कैटेगरी‑वाइज़ कहानी: लार्ज, मिड, स्मॉल

इस टेबल में हम “टिपिकल” लंबे समय की रेंज दिखा रहे हैं, ताकि आपको अंदाज़ा लगे कि कौन‑सी कैटेगरी से क्या उम्मीद रखी जा सकती है (ये एग्ज़ैक्ट नंबर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक डेटा और फंड उदाहरणों से निकली रेंज हैं)।angelone+3

30+ साल के लिए 1 लाख की अनुमानित वैल्यू (थिओरेटिकल रेंज)

कैटेगरीरेफरेंस फंड (उदाहरण)अनुमानित लम्बी अवधि CAGR रेंज1,00,000 की अनुमानित वैल्यू 30–35 साल में*
लार्ज कैपUTI Mastershare, Franklin India Bluechipbajajbroking+2लगभग 12–14%30 साल में ~30–40 लाख, 35 साल में ~45–60 लाख
मिड कैपFranklin India Prima Fundupstox+1लगभग 13–15%30 साल में ~35–50 लाख, 35 साल में ~55–70 लाख
स्मॉल कैपNippon India Small Cap, SBI Small Cap (छोटी अवधि के डेटा पर आधारित)[angelone]​10–15 साल में 20% के आसपासअगर 20% 25–30 साल चले, तो 1 लाख 2–4 करोड़ तक, पर जोखिम बहुत ज़्यादा

*यह “अगर इतना CAGR लगातार मिले” वाली थिओरेटिकल गणना है, पढ़ने में आसान बनाने के लिए राउंड की गई है; असली फंड्स में हर साल रिटर्न अलग होता है।upstox+3


4. अगर आपने यह किया होता…

ज़रा कल्पना कीजिए:

  • साल 1993 है। आपने Franklin India Bluechip जैसे किसी लार्ज कैप फंड में 1 लाख लगा दिए।torusdigital+1
  • ठीक उसी साल आपका दोस्त 1 लाख FD में 8–9% पर लगा देता है।

35 साल बाद:

  • आप म्यूचुअल फंड में लगभग 50–60 लाख के आस‑पास बैठे हैं (14% के आसपास CAGR मानकर)।
  • आपका दोस्त FD में लगभग 15–20 लाख के आसपास होगा (9% मानके, टैक्स काटकर और कम)।

अब एक और सीन:

  • 2010 में आपने Nippon India Small Cap Fund में 10,000 रुपये महीने की SIP शुरू की।[angelone]​
  • 10 साल में ही 10,000 की SIP लगभग 59–60 लाख के ऊपर पहुँची है (डेटा दिखाता है कि 10,000 SIP से 59,75,247 तक पहुँचा है)।[angelone]​

सोचिए, अगर यही SIP 25–30 साल तक चली होती और स्मॉल कैप वाला कम्पाउंडिंग कुछ हद तक जारी रहा होता, तो आप क्लासिक “करोड़पति से भी ऊपर” ज़ोन में होते।translate.google+1


5. सिर्फ डिस्ट्रीब्यूटर के ज़रिए निवेश क्यों? (और डायरेक्ट के नुक़सान)

आपने देखा कि सही फंड और सही समय पर बने रहना कितना ज़रूरी है। यहाँ पर एक अच्छा म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर आपके लिए “Google Maps” का काम करता है – रास्ता दिखाता है, गड्ढे दिखाता है, और टाइम‑टू‑टाइम रूट बदलता है।

डिस्ट्रीब्यूटर से निवेश करने के फायदे

  • सही फंड सिलेक्शन
    • मार्केट में सैकड़ों फंड हैं; हर AMC, हर कैटेगरी में पुराने और नए स्कीम।groww+1
    • डिस्ट्रीब्यूटर आपकी उम्र, गोल, रिस्क और समय के हिसाब से पोर्टफोलियो बनाता है – कौन‑सा लार्ज, कितना मिड, कितना स्मॉल; ये खुद तय करना आसान नहीं।
  • भावनात्मक कंट्रोल और गाइडेंस
    • 2008, 2020, 2022 जैसी गिरावटों में आम आदमी घबरा कर बेच देता है, यहीं पूरा खेल बिगड़ जाता है।[tatacapitalmoneyfy]​
    • डिस्ट्रीब्यूटर आपको समझाता है कि Fall भी कम्पाउंडिंग का हिस्सा है, गिरावट के समय SIP बंद नहीं, बल्कि जारी रखना है।
  • रीबैलेंसिंग और रिव्यू
    • साल‑दो साल में पोर्टफोलियो चेक करना, जिन फंड्स की स्टाइल बदली है या परफॉर्मेंस लगातार कमजोर है, उन्हें बदलना।
    • ये सारी चीज़ें रीबैलेंसिंग कहलाती हैं और इसे प्रोफेशनल करना ज़रूरी है, वरना धीरे‑धीरे रिस्क बढ़ जाता है या रिटर्न घट जाता है।groww+1
  • डॉक्यूमेंटेशन, नामिनी, टैक्स, SWP/SIP की प्लानिंग
    • नॉमिनी सही लगाना, फोलियोज़ को मैनेज करना, कैपिटल गेन, टैक्स हार्वेस्टिंग – आम आदमी के लिए ये सब सिरदर्द है।
    • डिस्ट्रीब्यूटर पूरा पेपरवर्क, KYC, ट्रांज़ैक्शन, फोलियो ट्रैकिंग में मदद करता है, जिससे आप सिर्फ एक चीज़ पर फोकस करते हैं – “लगातार निवेश”।
  • छोटे शहर/टियर‑2/3 इन्वेस्टर्स के लिए पर्सनल टच
    • आपके शहर में बैठा हुआ कोई व्यक्ति आपको लोकल भाषा में, आपकी सोच के हिसाब से समझा सके, ये अपने‑आप में बड़ा प्लस है।
    • फ़ोन करके पूछ सकते हैं – “Market गिर रहा है, SIP बंद कर दूँ क्या?” – ये सुविधा डायरेक्ट प्लान में नहीं मिलती।

डायरेक्ट में निवेश करने के नुक़सान (खासकर आम निवेशक के लिए)

डायरेक्ट प्लान में TER (खर्च) कम होता है, लेकिन आम निवेशक के लिए hidden cost बहुत बड़ा है – “गलत decisions”।

  • गलत फंड चुन लेना
    • बहुत सारे लोग सिर्फ 1–3 साल के रिटर्न देखकर “टॉप रिटर्न फंड” में कूद जाते हैं, जबकि वही फंड अगले 5–7 साल में नॉर्मल या औसत निकलता है।translate.google+1
    • कैटेगरी, स्टाइल, रिस्क समझे बिना सिर्फ नाम देखकर इन्वेस्ट करना डायरेक्ट में बहुत कॉमन गलती है।
  • मार्केट गिरने पर पैनिक में बेच देना
    • डायरेक्ट में आपके पास कोई “डांटने वाला” नहीं होता कि “मत बेच, बैठ जा चुपचाप, SIP चलने दे।”
    • छोटे‑छोटे पैनिक सेल पूरे कम्पाउंडिंग को तोड़ देते हैं; 35 साल की कहानी 7–10 साल में ही खत्म हो जाती है।
  • रीबैलेंसिंग न होना
    • मान लीजिए आपने 60% लार्ज, 30% मिड, 10% स्मॉल से शुरू किया, पर 10 साल बाद स्मॉल इतना बढ़ गया कि वो 30% हो गया – अब रिस्क बहुत ज़्यादा है।
    • डायरेक्ट इन्वेस्टर अक्सर ये चेक ही नहीं करते, न ही सही तरीके से रीबैलेंस कर पाते हैं।
  • टैक्स और रेगुलेशन की उलझन
    • LTCG, STCG, ग्रैंडफादरिंग, इंडेक्सेशन, डिविडेंड vs ग्रोथ – ये सब चीज़ें बदलती रहती हैं।[tatacapitalmoneyfy]​
    • डायरेक्ट में अपडेट रहना मुश्किल है; डिस्ट्रीब्यूटर आपको नए नियम समझाकर पैसे बचाने में मदद कर सकता है।
  • समय की भारी बर्बादी
    • हर फंड के फैक्टशीट, पोर्टफोलियो, रिस्क मेट्रिक्स खुद देखना बहुत टाइम लेता है।
    • वही समय आप अपने कॅरियर या बिज़नेस पर लगाएँ, और रिसर्च/सेलेक्शन का काम किसी प्रोफेशनल डिस्ट्रीब्यूटर पर छोड़ें, तो नेट रिज़ल्ट ज़्यादा अच्छा होता है।

6. आम आदमी के लिए आसान एक्शन प्लान

अंत में, अगर आप सच में चाहते हैं कि “आज से 25–35 साल बाद” आपकी कहानी भी वैसी ही बने जैसी इन पुराने फंड्स ने दिखाई है, तो यह सरल प्लान फॉलो करें:

  • सिर्फ म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के ज़रिये ही निवेश करें
    • अपने शहर/ऑनलाइन से किसी AMFI‑रजिस्टर्ड डिस्ट्रीब्यूटर को चुनें, जो आपकी भाषा और ज़रूरत समझे।
    • उनसे मिलकर गोल तय करें – रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई, घर, कॉर्पस आदि।
  • लार्ज + मिड + थोड़ा स्मॉल का संतुलित मिश्रण
    • लार्ज/फ्लेक्सी कैप – स्थिरता और लगातार रिटर्न के लिए (UTI Mastershare, Franklin Bluechip जैसी श्रेणियाँ)।bajajbroking+2
    • मिड कैप – ग्रोथ बढ़ाने के लिए (Franklin Prima जैसी कैटेगरी)।upstox+1
    • स्मॉल कैप – सिर्फ लिमिटेड एक्सपोजर के लिए, ज़्यादा लालच नहीं (Nippon/SBI Small Cap जैसे उदाहरण दिखाते हैं कि रिटर्न बड़ा है, पर रिस्क भी उतना ही)।[angelone]​
  • लंबी अवधि, लगातार SIP
    • कम से कम 15–20 साल का हॉराइज़न मानकर चलें; 25–35 साल पर असली जादू दिखता है।translate.google+1
    • गिरावट में भी SIP जारी रखें; यही वो समय होता है जब आप सस्ते यूनिट खरीद रहे होते हैं।
  • साल में एक बार पोर्टफोलियो रिव्यू अपने डिस्ट्रीब्यूटर के साथ
    • अगर लक्ष्य बदलें, आय बदले, या फंड की क्वालिटी गिरे, तभी बदलाव करें।
    • हर साल “फैशन के हिसाब से” फंड बदलने की आदत से बचें।

अगर आपने 1 लाख को 35 साल के लिए अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड में छोड़ दिया तो वो 50–60 लाख बन सकता है; अगर आपने 10,000 की SIP 25–30 साल तक डिस्ट्रीब्यूटर की मदद से अनुशासन के साथ चलायी, तो आप करोड़ों की दौड़ में होंगे – असली फर्क “रिटर्न” से ज़्यादा “सही रास्ते पर टिके रहने” से आता है, और यही काम एक अच्छा डिस्ट्रीब्यूटर आपके लिए करता है।translate.google+5

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