धन बनाने की शुरुआत दिमाग से होती है, सिर्फ पैसों से नहीं.
- Coach BSR (बीएसआर सर) एक इंडियन बिजनेस कोच, ट्रेनर और स्पीकर हैं जिन्होंने 2002 में 1200 रुपये सैलरी से शुरुआत की और बाद में वेबिनार के ज़रिए एक महीने में 1.2 करोड़ तक कमाया।
- वे सेल्स, बिज़नेस, पब्लिक स्पीकिंग और एंटरप्रेन्योर माइंडसेट पर कोचिंग देते हैं और मानते हैं कि पैसा कमाना “दुनिया की सबसे आसान चीज़ों में से एक” है, अगर आप सही मॉडल और सही लोगों से सीखें।
- सही माइंडसेट + सही मॉडल + लगातार सीखने की आदत = वेल्थ क्रिएशन, चाहे आप आज 15–20 हज़ार कमा रहे हों या ज़ीरो से शुरू कर रहे हों।
पिंच पॉइंट्स (जहां बात झकझोरती है)
- “पहला 1 करोड़ इज़ अ बिच – लेकिन आपको करना ही पड़ेगा।” मेहनत, रिसर्च और स्ट्रगल से भागकर नहीं बनेगा।
- जॉब को “ड्रग” मानना गलत है; जॉब से भी आप सुंदर पिचाई, सत्य नडेला या किसी सीईओ की तरह करोड़ों कमा सकते हैं, अगर आप ओनर की तरह काम करें।
- जल्दी पैसा डबल करने की बीमारी (क्रिप्टो/डे ट्रेडिंग में बिना समझ कूदना) ज़्यादातर लोगों को बर्बाद कर देती है; 98% लोग हारते हैं, 2% ही जीतते हैं।
- 70% अमीर परिवार दूसरी पीढ़ी तक वेल्थ गंवा देते हैं क्योंकि विज़न, वैल्यू और सिस्टम अगली पीढ़ी तक सही तरह पास नहीं होते।
- कार और घर पर जल्दी पैसा फेंकना, जब तक आपका इंजन (स्किल और बिज़नेस/इनकम सिस्टम) स्ट्रॉन्ग न हो, ये भी एक बड़ा फाइनेंशियल मिस्टेक है।
पार्ट 1 – पहला 1 करोड़: माइंडसेट और आइडेंटिटी
- करोड़पति बनने का पहला कदम: फर्म डिसीजन
- “करना है या नहीं करना है?” – ये क्लियर होना चाहिए, वरना आप दो दिन बाद खुद ही पीछे हट जाओगे।
- फाइनेंशियल क्लैरिटी = “मैं करोड़पति हूं” की आइडेंटिटी बनाना, फिर अपने लक्ष्य (1 करोड़, 10 करोड़) के हिसाब से फील्ड चुनना।
- कंफ्यूज्ड आइडेंटिटी से बाहर निकलो
- जैसे हेल्थ में: कभी कहते हो “मैं बहुत मोटा हूं”, कभी “मैं ऋतिक जैसा फिट बनूंगा” – यही कंफ्यूजन पैसा और करियर में भी होता है।
- जब आप साफ तय करते हो – “मैं करोड़पति आइडेंटिटी वाला इंसान हूं” – तब आपके फैसले, दोस्त, काम, सीखना सब बदल जाता है।
- सिर्फ मेहनत नहीं, सही दिशा
- बिना मैप बॉम्बे की जगह उल्टी दिशा में भागने जैसा है “बिना रिसर्च तेज दौड़ना” – सालों बाद भी आप वहीं के वहीं रह जाते हो।
- पहले दो–तीन साल तक सीखना, रिसर्च, मार्केट समझना – ये सब कंपाउंडिंग की तरह है; हथौड़ा सही जगह पड़ते ही रिज़ल्ट एक्सपोनेंशियल होता है।
- माइंडसेट + स्ट्रेटेजी = लीवरेज
- 1 करोड़ तक पहुंचने में चप्पल घिसती है, 10 करोड़, 100 करोड़ बाद में आसान लगने लगते हैं क्योंकि आपके पास कनेक्शन, सिस्टम, टेक्नोलॉजी, कोच, टीम की लीवरेज आ जाती है।
- जो 100 करोड़ पर भी रोज 200 फोन खुद उठा रहा है, वह माइंडसेट बदले बिना 1000–10,000 करोड़ तक नहीं जा सकता, सिर्फ 60–60 साल और लगेंगे।
पार्ट 2 – स्क्रैच से 1 करोड़ तक स्टेप–बाय–स्टेप (2026 के लिए प्रैक्टिकल रास्ता)
- Step 1: क्लियर डिसीजन और विज़न
- लिखकर तय करो: मुझे अगले 5–7 साल में 1 करोड़ बनाना है, चाहे अभी 15–20 हज़ार ही कमा रहा हूं।
- टाइगर वुड्स वाला मॉडल: पहले गेंद और होल को दिमाग में साफ देखो, फिर शॉट मारो – जितनी क्लैरिटी, उतना अच्छा एक्ज़िक्यूशन और रिज़ल्ट।
- Step 2: जॉब + साइड हसल
- 25,000 की जॉब से सीधा 1 करोड़ बनना बहुत मुश्किल है; इसलिए अचानक जॉब छोड़ने के बजाय साइड हसल शुरू करो।
- सुबह/शाम का समय रिसर्च, वीडियो देखना, मॉडल समझना, स्किल सीखने और छोटे–छोटे एक्सपेरिमेंट लगाने में लगाओ।
- Step 3: सही बिज़नेस मॉडल कॉपी करो (इंटेलिजेंटली)
- 50 लोगों को देखो जो 1 करोड़ कमा रहे हैं, उनमें से वो मॉडल चुनो जो आपकी पर्सनालिटी से मैच करता है – जैसे उनके लिए ट्रेनिंग/कोचिंग मॉडल।
- शुरू में ज्यादा ब्रेन स्टॉर्मिंग नहीं, जिसने मॉडल चलाया है, उसे एज़ इट इज़ कॉपी करो – इसे कॉपी नहीं, “इंटेलिजेंट मूव” कहते हैं।
- Step 4: फिर इनोवेशन जोड़ो
- जैसे–जैसे आप काम में माहिर होते जाओ, टेक्नोलॉजी, अपने एक्सपीरियंस, टीम, कस्टमर की ज़रूरत के हिसाब से मॉडल में अपने टच से बदलाव करो।
- नहीं तो ज़िंदगी भर लोग कहेंगे – “ये तो फलाने का कॉपी है” – ब्रांड बनने के लिए कॉपी के बाद इनोवेशन ज़रूरी है।
- Step 5: मार्केट अवेयर रहो और ट्रेंड पकड़ो
- कोच BSR ने 2018–19 में ऑनलाइन ट्रेनिंग सीख ली थी, इसलिए कोविड के पहले महीने में उनकी इनकम 5–7 लाख से सीधा 1.2 करोड़ पर पहुंच गई।
- ट्रेंड अक्सर यूएस/यूके/ऑस्ट्रेलिया में 10–20 साल पहले दिख जाते हैं; वहां क्या चल रहा है, उसको देखकर इंडिया में जल्दी पकड़ो – जैसे पॉडकास्टिंग।
- Step 6: ब्रेक और सोचने का टाइम
- बिज़नेस को बढ़ाने के लिए भागना नहीं, सोचना, रिसर्च करना, इंटेलेक्चुअल लोगों से बात करना और किताबें पढ़ना ज़रूरी है।
- उनके कोचिंग क्लाइंट्स जब 15 दिन के ब्रेक पर गए, तो सिस्टम्स सेट हुए, टीम को ओनरशिप मिली, दिमाग फ्रेश हुआ और बिज़नेस उल्टा बढ़ गया।
पार्ट 3 – जनरेशनल वेल्थ और लेगसी बनाना
- बहुत बड़ा विज़न डिस्कवर करो
- जनरेशनल वेल्थ = सिर्फ इतना पैसा नहीं कि “मेरी पुश्तें खा लें”, बल्कि टाटा, स्टेन, वॉलमार्ट, मर्सिडीज जैसी 100–400 साल की लेगसी बनाना।
- ऐसा विज़न कॉपी–पेस्ट से नहीं होता; जैसे ए.आर. रहमान अगर अंबानी जैसा बनने चले होते या अंबानी अमिताभ जैसा, तो दोनों अपने–अपने क्षेत्र के आइकन नहीं बनते।
- 25 साल की क्लैरिटी और ज़ीरो कॉम्प्रोमाइज
- जिन लोगों ने जनरेशनल वेल्थ बनाई, उन्हें कम से कम “क्वार्टर सेंचुरी” (25 साल) की क्लैरिटी होती है, जबकि एवरेज इंसान को 3 महीने की भी नहीं होती।[youtube]
- भगत सिंह ने 23 साल की उम्र में विज़न के लिए जान न्योछावर कर दी – यही “जीरो कॉम्प्रोमाइज” है; जहां विज़न में कॉम्प्रोमाइज, वहीं वेल्थ का नाश शुरू।[youtube]
- कोर वैल्यू और सिस्टम अगली पीढ़ी को सिखाओ
- किताबें “Good to Great” और “Built to Last” दिखाती हैं कि हर ग्रेट कंपनी का एक कोर होता है – वैल्यू और पर्पज़ – जिसे सिस्टम से प्रोटेक्ट किया जाता है।[youtube]
- रोटरी, लायंस, रेड क्रॉस, ढोलकिया फैमिली आदि में कोर वैल्यू (जैसे “Service Above Self”) इतनी स्ट्रॉन्ग हैं कि पीढ़ियाँ बदलती हैं, लेकिन इम्पैक्ट नहीं रुकता।[youtube]
- विज़न शेयर करना और एक्सपर्ट्स बोर्ड पर लाना
- क्यों 70% फैमिली दूसरी जनरेशन में वेल्थ खो देती है
- कारण: कोर वैल्यू न सिखाना, फोकस और डिसिप्लिन की कमी, तुक्के से आई वेल्थ पर ओवरकॉन्फिडेंस, और “सिर्फ खर्च/एन्जॉय” वाला एटिट्यूड।[youtube]
- सॉल्यूशन: बच्चों को स्ट्रगल का अनुभव देना (जैसे ढोलकिया फैमिली का मॉडल – अमीर परिवार के बच्चे को भी अनजान शहर में कम पैसे पर भेजना) ताकि वे ग्राउंडेड रहें।[youtube]
पार्ट 4 – वेल्थ को ग्रो और प्रोटेक्ट कैसे करें (इन्वेस्टमेंट और सेक्टर)
- “जल्दी डबल” के चक्कर से बचो
- 100 करोड़ को कैसे बांटेंगे? (उनका फ्रेमवर्क)
- लगभग 10% – एफडी/लिक्विड फंड जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में ताकि 24 घंटे में पैसा हाथ में आ सके।[youtube]
- लगभग 40% – रियल एस्टेट (ज़मीन पर ज़्यादा फोकस) ताकि एसेट की वैल्यू और रेंटल इनकम दोनों बनें और कंट्रोल आपके हाथ में रहे।[youtube]
- लगभग 20% – गोल्ड में, क्योंकि क्राइसेज़ या वॉर के समय भी इसका गिरना सीमित होता है, बल्कि कई बार उल्टा बढ़ता है।[youtube]
- लगभग 30% – स्टॉक मार्केट/म्यूचुअल फंड्स के अच्छे लॉन्ग–टर्म शेयर में; लेकिन ट्रेडिंग को वे इन्वेस्टमेंट नहीं, फुल–टाइम प्रोफेशन मानते हैं।[youtube]
- जो पैसा बचे, वे उसे हाई–रिस्क स्टार्टअप्स/यंग बिज़नेस में इक्विटी के रूप में लगाना पसंद करेंगे।[youtube]
- खुद में इन्वेस्टमेंट सबसे ज़रूरी
- उन्होंने 1 लाख रुपये सीखने में लगाए और उसी से बने मॉडल ने पहले ही महीने में 1.2 करोड़ से ज़्यादा जनरेट कर दिया।[youtube]
- आपका 3000–5000 महीना अगर सिर्फ एसआईपी में डालने से ज्यादा, स्किल, कोर्स, कोच और नई इनकम स्ट्रीम सीखने में लगे, तो आपकी कमाई 1 लाख से 10 लाख, फिर 50 लाख तक जा सकती है – तब एसआईपी का इम्पैक्ट भी कई गुना हो जाएगा।[youtube]
- AI के दौर में कौन से सेक्टर लंबे चलेंगे?
- ह्यूमन इमोशन से जुड़े सेक्टर – जैसे पब्लिक स्पीकिंग, सेल्स, बिज़नेस स्ट्रेटेजी, रियल एस्टेट साइकॉलजी, सर्विस–ओरिएंटेड काम – जहां इंसानी टच ज़रूरी है।[youtube]
- ट्रेडिशनल सेक्टर: बैंकिंग, रियल एस्टेट, एनर्जी, फूड, एफएमसीजी, टायर/ऑटो, पर्सनल केयर – इनकी बेसिक ज़रूरत AI रिप्लेस नहीं कर सकती, सिर्फ ऑप्टिमाइज़ कर सकती है।[youtube]
पार्ट 5 – जॉब, बिज़नेस और एंटरप्रेन्योर माइंडसेट
- क्या जॉब से अमीर बना जा सकता है?
- Employee vs Self–Employed vs Entrepreneur
- Employee: सिर्फ जॉब सेफ्टी और फिक्स्ड सैलरी के बारे में सोचता है।[youtube]
- Self–employed: सब काम खुद करने की आदत – छुट्टी, स्केल, सिस्टम – सबका गला घोंट देती है; 15–20 साल में भी छुट्टी नहीं ले पाता।[youtube]
- Entrepreneur: सिस्टम बनाता है, सही लोगों को हायर करता है, सॉल्यूशन ढूंढता है और बड़े रिस्क लेकर 1 करोड़ लोगों तक पहुंचने जैसे लक्ष्यों पर काम करता है।[youtube]
- ब्रेक और हाई–एनर्जी वेल्थ
- सबसे बड़ा मिथ: “सिर्फ हार्डवर्क से वेल्थ”
- BSR के शब्दों में – सबसे बड़ा मिथ यह है कि वेल्थ सिर्फ हार्डवर्क से बनती है; आप वेल्थ क्रिएट कर सकते हैं “फन लेते हुए, एन्जॉय करते हुए” भी – जब आप सही विज़न, सही मॉडल और सही टीम के साथ काम करते हैं।[youtube]








