श्रीहित प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार मोबाइल में किसी की भी फोटो (चाहे महाराज जी की हो, भगवान की हो या प्रियजनों की) लगाना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन उसके साथ जुड़ी सावधानियाँ बहुत ज़रूरी हैं।
मोबाइल में फोटो लगाने पर मूल बात
- महाराज जी बताते हैं कि मोबाइल में अपनी, प्रियजनों की या संतो की फोटो लगाना स्वाभाविक है, लोग जिसे प्रिय मानते हैं, उसे स्क्रीन पर रखना चाहते हैं।
- वे यह भी समझाते हैं कि असली सवाल “फोटो लगाना सही है या नहीं” से ज़्यादा बड़ा है “मोबाइल का इस्तेमाल कितना संयमित और पवित्र ढंग से हो रहा है।”
पवित्रता और शुचिता की सावधानियाँ
- महाराज जी विशेष रूप से कहते हैं कि झूठे हाथ, खाए हुए हाथ या शौच के बाद बिना हाथ धोए मोबाइल नहीं छूना चाहिए, क्योंकि यही फोन जेब में रखकर हम मंदिर, सत्संग और पूजास्थलों तक ले जाते हैं।
- वे समझाते हैं कि मोबाइल हर समय साथ रहता है, इसलिए उसे यथासंभव साफ‑सुथरा और पवित्र रखना चाहिए, वरना उसी उपकरण से हम मंत्र सुनते हैं, भजन चलाते हैं और ईश्वर का नाम भी लेते हैं।
गलत समय पर मोबाइल से बचने की सीख
- प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि खाना खाते समय मोबाइल चलाना शरीर और मन, दोनों के लिए हानिकारक है और भोजन का अपमान भी माना जाता है; भोजन को श्रद्धा और एकाग्रता के साथ लेना चाहिए।
- इसी तरह वे सलाह देते हैं कि पूजा‑पाठ, सत्संग और भजन के समय फोन से दूर रहें, स्विच ऑफ या साइलेंट कर दें, ताकि भगवान और संतों की वाणी मन में गहरे उतर सके।
मोबाइल की लत और आध्यात्मिक नुकसान
- महाराज जी मोबाइल की बढ़ती लत पर चिंता जताते हैं कि यह इंसान को बहिर्मुख बना कर हजारों अनावश्यक संबंधों में उलझा देता है, जबकि साधना का मार्ग हमें भीतर की ओर, भगवान की ओर बुलाता है।
- वे कहते हैं कि समस्या आने पर पहले भगवान से संवाद होना चाहिए, पर आज इंसान तुरंत किसी व्यक्ति को फोन लगाता है और धीरे‑धीरे उसका भरोसा ईश्वर से हट कर केवल लोगों पर टिक जाता है।
बच्चों, युवाओं और परिवार के लिए चेतावनी
- महाराज जी बताते हैं कि छोटे बच्चों को शांति से रखने के लिए मोबाइल थमा देना एक खतरनाक आदत है, इससे लत, चिड़चिड़ापन और मानसिक समस्याएँ जन्म ले सकती हैं, और बच्चा अपनी ही एक कृत्रिम दुनिया में जीने लगता है।
- वे समझाते हैं कि परिवार में भी चार लोग साथ बैठकर एक‑दूसरे से बात करने के बजाय चारों अपने‑अपने फोन में खो जाते हैं, जिससे मानवीय रिश्ते कमजोर होते हैं और “मनुष्यता” घट कर “पशुता” बढ़ने लगती है।
असरदार निष्कर्ष: फोटो नहीं, उपयोग बदलो
- इस पूरे प्रसंग का सार यह है कि मोबाइल में महाराज जी की फोटो लगाना निषिद्ध नहीं, लेकिन यदि वही मोबाइल गंदे हाथों से छुआ जाए, अश्लील सामग्री, झूठ, चुगली और व्यर्थ मनोरंजन का माध्यम बन जाए, तो फोटो की पवित्रता भी केवल दिखावा रह जाती है।
- सच में असरदार भक्ति वही है, जहाँ मोबाइल भजन, सत्संग, पढ़ाई और सेवा का साधन बने, सीमित समय के लिए, शुचिता के साथ, और ज़रूरत पड़ने पर निसंकोच स्विच ऑफ करने का साहस भी हो – तभी मोबाइल पर लगी कोई भी फोटो हमारे जीवन में कल्याणकारी प्रभाव छोड़ पाएगी।






