प्रश्न का उल्लेख
- अमित जी पुणे होने से महाराज जी कह रहे हैं कि मैं आपके जैसे चेहरे की चमक चाहता हूं महाराज जी।
किडनी फेल और प्रसन्नता
- अरे भैया, किडनी फेल वाले का चेहरा कभी देखा है?
- हमारी दोनों किडनी फेल है।
- लेकिन हम श्री जी से अपना चित्त जुड़ा हुआ पाते हैं।
- गुरुदेव की कृपा से, इष्ट की कृपा से।
- इसलिए हम हर समय प्रसन्न रहते हैं।
- खूब खुश रहते हैं।
- इतना खुश रहते हैं कि हम तुम्हें बता नहीं सकते।
- खुशी की उबाल आती है।
- आनंद की उबाल आती है।
- ऐसा लगता है चिल्ला‑चिल्ला के रोऊं।
- इतना आनंद बढ़ता है।
- इतनी खुशी बढ़ती है गुरुदेव की कृपा से, चित्त श्री जी में जुड़ा होने के कारण।
देहिक सुख‑साधन न ले पाने की स्थिति
- भैया दूध, रबड़ी, रसगुल्ला, मेवा, मिष्ठान, जूस ये तो हम ले ही नहीं सकते।
“भगवत आश्रय” और जो चमक आप देखते हैं
- भगवत आश्रय का आप जो भी आप देख रहे हैं, भगवत आश्रय को देख रहे भैया।
- यह भगवान का कृपा प्रसाद देख रहे हैं ना।
- ना इसमें मेरी कोई योग्यता है।
- ना मेरा कोई बल है ना शरीर में, ना बुद्धि में।
- दोनों को हमारे भगवान अर्जुन के रथ की तरह चला रहे हैं।
- उसी का आनंद सबको प्राप्त हो रहा है।
- यह कोई खाने‑पीने की चमक नहीं है।
- तो अगर तुमको कुछ ऐसा लग रहा हो चेहरे पर तो हमारी लाडली जु का प्रताप है।
- यह कोई खाने‑पीने या कोई ऐसा नहीं है।
- ये लाडली जु का प्रताप है।
भगवत प्रताप की सामर्थ्य – रावण और अंगद का उदाहरण
- भगवत प्रताप से क्या नहीं हो सकता? समझो।
- जो 20ों बार कैलाश उठा लिया।
- रावण 20ों बार कैलाश उठा लिया।
- भगवान शंकर और पार्वती और गणों के सहित उस रावण की सभा में ऐसे‑ऐसे बैठे नंतक देवांतक जिनकी सामर्थ्य अपार थी।
- लेकिन अंगद जी ने भगवान के प्रताप का सुमिरन करके जब पैर रोप दिया तो सभा में किसी की ताकत नहीं कि हिला सके।
- राम प्रताप सुमिरपन रूपा।
- भगवत प्रताप में सामर्थ होती है।
- साधना और यह सब तो बहुत छोटी चीज है।
- जब भगवान के प्रताप का सुमिरन होता तब बल बढ़ता है।
जो बल‑बुद्धि आप देखते हैं, उसका कारण
- ये जो आप बल देख रहे हैं, जो आप बुद्धि देख रहे हैं, जो आप जो भी किंचन मात्र आपको लग रहा हो ये सिर्फ लाडली जु का प्रताप है और कुछ नहीं है।
- लाडली जु से आप भी जुड़ो, आप भी ऐसे हो जाओगे।
- लाडली जु का प्रताप काम कर रहा है।
लाडली जु, श्री लाल जु और उनका प्रेम‑आनंद
- प्रेमंद… प्रेम।
- श्री लाडली जु चांद्रानंद घन प्रेम मूर्ति, किशोरी आनंद श्री लाल जु।
- और उनकी हम शरण में हैं।
- तो प्रेमानंद, लाडली लाल का प्रताप, लाडली लाल का प्रेम, लाडली लाल का आनंद वही आप देख रहे हैं।[youtube]
- और कोई ऐसी कोई जड़ी‑बूटी या ऐसा कुछ.
- कितनी परेशानियां, लेकिन हर समय प्रसन्न रहता हूं, खुश रहता हूं, ये श्री जी का प्रताप।
- उन्हें सरकार जी लंदन से… श्री हरिवंश…।
ऊपर के सभी बिंदु केवल महाराज जी की उसी प्रसंग की वाणी को क्रमबद्ध और टुकड़ों में बाँटकर लिखे गए हैं; इनमें किसी अन्य स्रोत या मेरी ओर से कोई अर्थ‑व्याख्या या जोड़ नहीं किया गया है






