एआई साथी और इंसान: भावनात्मक निर्भरता का खतरा

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एआई साथी: दोस्ती या जाल?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल एक डिजिटल असिस्टेंट नहीं रहा, बल्कि यह दोस्त, शिक्षक, काउंसलर और यहां तक कि वर्चुअल पार्टनर बनकर हमारी जिंदगी में गहराई से प्रवेश कर चुका है। खासकर चैटबॉट्स, वॉयस असिस्टेंट्स और पर्सनलाइज्ड अवतार्स के रूप में एआई साथी इंसानों को भावनात्मक सहारा और दोस्ती का एहसास दे रहे हैं। लेकिन वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह रिश्ता जहरीला (toxic) भी हो सकता है, क्योंकि इससे भावनात्मक निर्भरता (emotional dependency) का खतरा बढ़ रहा है।

भावनात्मक निर्भरता: क्यों है खतरा?

  • गहरी भावनात्मक लगाव: कई यूजर्स अपने एआई साथी से इतना जुड़ जाते हैं कि वे उन पर भावनात्मक रूप से निर्भर हो जाते हैं। जब एआई सेवा में कोई खराबी आती है या वह अस्थायी रूप से बंद हो जाती है, तो यूजर्स को वैसा ही दुख और शोक महसूस होता है जैसा किसी प्रियजन को खोने पर होता है.

  • आसान, गैर-न्यायिक संवाद: एआई साथी एक सुरक्षित और गैर-न्यायिक स्पेस देते हैं, जहां यूजर अपने दिल की बात खुलकर कह सकते हैं। लेकिन यह सुविधा असली मानवीय रिश्तों में जरूरी समझौते, भावनात्मक श्रम और संवाद की जगह ले सकती है, जिससे यूजर असली दुनिया के रिश्तों से दूर हो सकते हैं।

  • असली और नकली भावनाओं का भ्रम: एआई साथी की संवेदनशीलता और स्मृति यूजर्स को यह भ्रम दे सकती है कि वे असली भावनाएं रखते हैं, जबकि वे केवल एल्गोरिद्म पर आधारित होते हैं। इससे यूजर्स को असली और नकली भावनाओं में फर्क करना मुश्किल हो सकता है, खासकर बच्चों और किशोरों के लिए।

  • मानसिक स्वास्थ्य पर असर: रिसर्च के मुताबिक, लंबे समय तक एआई साथी पर निर्भर रहने से मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जैसे डिप्रेशन, अकेलापन और सामाजिक अलगाव। कुछ मामलों में, एआई साथी के गलत या असंवेदनशील जवाब यूजर की मानसिक स्थिति और बिगाड़ सकते हैं।

  • रियल लाइफ रिलेशनशिप्स पर प्रभाव: एक अध्ययन में पाया गया कि जितना ज्यादा कोई व्यक्ति एआई से सामाजिक समर्थन महसूस करता है, उतना ही कम उसे अपने परिवार या दोस्तों से समर्थन महसूस होता है। इससे यूजर असली रिश्तों से कट सकते हैं।

भारत में बढ़ती लोकप्रियता और चुनौतियां

भारत में युवा और डिजिटल रूप से जिज्ञासु आबादी के बीच एआई साथी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लोग इन्हें दोस्त, काउंसलर या पार्टनर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है, खासकर तब जब एआई चैटबॉट्स बिना पर्याप्त सुरक्षा या गाइडेंस के उपलब्ध हों।

बच्चों और किशोरों के लिए विशेष खतरा

  • पारासोशल रिलेशनशिप: किशोर और बच्चे अपने एआई साथी से गहरा भावनात्मक रिश्ता बना सकते हैं, जिससे उनकी असली और वर्चुअल दुनिया में फर्क करने की क्षमता कमजोर हो सकती है।

  • गलत सलाह और जोखिम: कई बार एआई साथी गलत या खतरनाक सलाह भी दे सकते हैं, जैसे मेडिकल, इमोशनल या रिलेशनशिप से जुड़ी सलाह, जो बिना किसी विशेषज्ञता के दी जाती है।

  • निजता और डेटा सुरक्षा: एआई साथी यूजर्स के निजी डेटा का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे निजता और सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है।

समाधान और सुझाव

  • मानसिक स्वास्थ्य गार्डरेल्स: एआई कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म्स में मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय जोड़ने चाहिए, ताकि यूजर्स की भलाई सुनिश्चित हो सके।

  • नीति और रेगुलेशन: नीति-निर्माताओं को एआई साथी के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस और रेगुलेशन बनाने चाहिए, खासकर बच्चों और किशोरों के लिए9

  • डिजिटल लिटरेसी: यूजर्स को यह समझाना जरूरी है कि एआई साथी असली इंसान नहीं हैं, और उनसे जुड़ी भावनाओं को संतुलित रखना जरूरी है।

  • मानवीय रिश्तों को प्राथमिकता: असली रिश्तों को प्राथमिकता देना और एआई साथी का संतुलित उपयोग करना ही बेहतर मानसिक स्वास्थ्य का रास्ता है।

निष्कर्ष

एआई साथी तकनीक का एक नया रूप हैं, जो दोस्ती और भावनात्मक समर्थन का वादा करते हैं। लेकिन इनसे बढ़ती भावनात्मक निर्भरता इंसानों को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से कमजोर बना सकती है। समय आ गया है कि हम एआई साथी के फायदे और नुकसान को समझें, और तकनीक का इस्तेमाल विवेकपूर्ण और संतुलित तरीके से करें378

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