हर्ष को हम आनंद में परिणत ( रूपांतरित) कर लें Let us transform joy into bliss.

हर्ष को हम आनंद में परिणत ( रूपांतरित) कर लें

जय श्री कृष्ण जय श्री राधा

(प्रस्तुत लेख हमारे परम पूज्य श्री राधाबबा (स्वामी चक्रधरजी महाराज) की विशेष सामग्री का संकलन है. ये लेख गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित ‘आस्तिकता की आधारशीला’ पुस्तक से लिया गया है.)

अनुकूलता में हमें हर्ष होता ही है, पर यह हर्ष एक विकार है: आनंद में सर्वथा भिन्न वस्तु है यह. हर्ष को आनंद में परिणत कर ले, यही करना है. आनंद तो प्रभु का स्वरुप है, प्रतिबिम्ब है, जो मन- बुद्धि रुपी दर्पण पर प्रतिबिम्बित होता है और तब तक स्थाई रूप से बना ही रहता है, जब तक मन-बुद्धि का भी आत्यंतिक विलय प्रभु में नहीं हो जाता. किसी भी हर्ष को हम आनंद का रूप दे दें अथार्त ऐसी भावना दृढ कर ले कि वह हर्ष हमें कभी छोड़े ही नहीं. फिर यह विकार वरदान बन जाएगा और यह ही करना है.

  • Related Posts

    मेटा पर जुर्माना, लेकिन ट्विटर–यूट्यूब पर गंदी वीडियो की बाढ़ क्यों?

    नीचे इस पूरे मुद्दे को अलग-अलग एंगल से समझने की कोशिश की है। 1. मामला आखिर है क्या? सबसे पहले तस्वीर साफ कर लें।एक तरफ तो मेटा (फेसबुक–इंस्टाग्राम की कंपनी)…

    Continue reading
    सुबह पेट साफ़ न होना: शरीर और आत्मा दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी

    प्रस्तावना भारतीय परंपरा में सुबह का समय ब्रह्ममुहूर्त कहा जाता है — यह केवल योग या ध्यान के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर के शुद्धिकरण और आत्म-शुद्धि का भी समय…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    टीनेजर्स की मस्ती को मोदी सरकार क्या हैंडल कर लेंगी ?

    टीनेजर्स की मस्ती को मोदी सरकार क्या हैंडल कर लेंगी ?

    14 साल की SIP से 5 करोड़ का सफर: राहुल जैन की कम्पाउंडिंग वाली सफलता की कहानी

    14 साल की SIP से 5 करोड़ का सफर: राहुल जैन की कम्पाउंडिंग वाली सफलता की कहानी

    मैं youtube वीडियो देखकर क्या सोचता हूँ

    मैं youtube वीडियो देखकर क्या सोचता हूँ

    भारत में एक से ज़्यादा शादी: आमिर खान की तीसरी शादी और बिगैमी कानून की पूरी सच्चाई

    भारत में एक से ज़्यादा शादी: आमिर खान की तीसरी शादी और बिगैमी कानून की पूरी सच्चाई

    प्रेमी, प्रेमिका और मंगेतर का मर्डर: क्या अध्यात्म से दूर होता इंसान सच में राक्षस बनता जा रहा है?

    प्रेमी, प्रेमिका और मंगेतर का मर्डर: क्या अध्यात्म से दूर होता इंसान सच में राक्षस बनता जा रहा है?

    क्यों फ्लैट के प्रॉफिट पर हम झूमते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड और SIP से दूर भागते हैं?

    क्यों फ्लैट के प्रॉफिट पर हम झूमते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड और SIP से दूर भागते हैं?