उग्र स्वभाव को कैसे शांत करें? श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के अमूल्य उपदेश (EN)

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श्री महाराज जी का दिव्य वचन: उग्र स्वभाव पर नियंत्रण कैसे पाएं?

श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज से जब यह पूछा गया कि उग्र स्वभाव वाले व्यक्ति को कैसे शांत करें, तो उन्होंने अत्यंत सरल, सटीक और व्यावहारिक उत्तर दिया। महाराज जी ने बताया:

“नाम जप से भगवान का नाम जप परम शीतलता प्रदान करता है। अगर हम नाम जप खूब करें तो हमारा उग्र स्वभाव नम्र स्वभाव में, विनय में, दैन्य में परिवर्तित हो जाएगा।”1

महाराज जी कहते हैं कि केवल औपचारिकता से नहीं, बल्कि पूरे मन से, खूब डटकर भजन और नाम जप करना चाहिए। जब स्वभाव बहुत मलिन और दृढ़ हो जाता है, तब व्यक्ति हिंसा भी कर सकता है, चाहे वह अपनी मां, अपने प्रियजनों के प्रति ही क्यों न हो। उग्र स्वभाव बड़ा निंदनीय है; यह केवल अपने लिए ही नहीं, पूरे परिवार और समाज के लिए घातक है।

उग्र स्वभाव के लक्षण और परिणाम

महाराज जी ने स्पष्ट किया कि उग्र स्वभाव में व्यक्ति को बुरा लगते ही उसकी प्रतिक्रिया क्रिया में बदल जाती है। वह अपने पूज्य जनों का अपमान कर सकता है, प्रियजनों की हिंसा कर सकता है। बाद में पछतावा होता है, परंतु तब तक नुकसान हो चुका होता है। इसके विपरीत, शांत स्वभाव में व्यक्ति को भले ही बुरा लगे, वह चुपचाप सहन कर लेता है, जिससे कोई बड़ा अनर्थ नहीं होता।

शांत स्वभाव का महत्व

महाराज जी ने कहा:

“शांत स्वभाव में होता है कि हमें बुरा लग रहा है पर हम कुछ कह नहीं रहे, चुपचाप सह रहे हैं, वह चलेगा। लेकिन उग्र स्वभाव वाला बुरा लगते ही वह क्रिया में परिणित हो जाएगा।”1

इसलिए, उग्र स्वभाव को नियंत्रित करना अनिवार्य है। यह न केवल अपने लिए, बल्कि अपने परिवार, समाज और आत्मिक उन्नति के लिए भी आवश्यक है।

उग्र स्वभाव को शांत करने के उपाय

1. नाम जप (भगवान का नाम स्मरण)

  • महाराज जी के अनुसार, भगवान का नाम जप परम शीतलता प्रदान करता है।

  • निरंतर नाम जप करने से स्वभाव में परिवर्तन आता है।

  • उग्र स्वभाव, नम्रता और दैन्य में बदल जाता है।

2. सत्संग

  • सत्संग सुनना भी स्वभाव में परिवर्तन लाता है।

  • सत्संग से व्यक्ति को अपने दोषों का बोध होता है, और सुधार की प्रेरणा मिलती है।

3. भजन

  • डटकर भजन करने से मन में शांति आती है।

  • भजन से मन की मलिनता दूर होती है, और आत्मा को शुद्धि मिलती है।

महाराज जी के वचन में छुपा गूढ़ अर्थ

महाराज जी ने यह भी कहा कि उग्र स्वभाव बहुत दृढ़ हो जाता है, तो व्यक्ति बाद में पछताता है, लेकिन उस समय वह अपने प्रियजनों को भी कष्ट पहुंचा सकता है। इसलिए, सत्संग और नाम जप ही एकमात्र उपाय है जिससे स्वभाव में स्थायी परिवर्तन आ सकता है।

सारांश: महाराज जी की शिक्षा का निचोड़

  • नाम जप: निरंतर, पूरे मन से भगवान का नाम जपें।

  • सत्संग: संतों की वाणी, सत्संग, कथा-कीर्तन में भाग लें।

  • भजन: डटकर, एकाग्रचित्त होकर भजन करें।

  • शांत स्वभाव: बुरा लगने पर प्रतिक्रिया देने से बचें, सहनशील बनें।

  • परिवर्तन: ये उपाय अपनाने से उग्र स्वभाव स्वतः शांत स्वभाव में बदल जाएगा।

महाराज जी के उपदेशों का जीवन में महत्व

महाराज जी के वचन केवल उपदेश नहीं, बल्कि जीवन को बदलने वाली संजीवनी हैं। उन्होंने बताया कि यदि हम निष्काम भाव से, सत्य मार्ग पर चलकर, भगवान के नाम का जप और सत्संग करते हैं, तो कोई भी उग्र स्वभाव, कोई भी मलिनता, कोई भी विकार हमारे ऊपर स्थायी प्रभाव नहीं डाल सकता।

मूल स्रोत के अनुसार निष्कर्ष

श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के अनुसार, उग्र स्वभाव को शांत करने का सर्वोत्तम उपाय है – नाम जप और सत्संग। जितना अधिक नाम जप करेंगे, उतना स्वभाव में शीतलता, विनय और दैन्यता आएगी। सत्संग और भजन से मन का मलिनपन दूर होगा और जीवन में स्थायी शांति का वास होगा।

“सत्संग सुनो और नाम जप करो, तो स्वभाव में परिवर्तन आ जाएगा।”1

अंतिम शब्द

महाराज जी के दिव्य वचनों का सार यही है कि उग्र स्वभाव को बदलने के लिए बाहरी उपायों से अधिक, भीतरी साधना और भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे प्रभावशाली और स्थायी उपाय है। सत्संग, नाम जप और भजन – यही जीवन को शीतल, शांत और मंगलमय बनाते हैं।

स्रोत:YouTube Video: Ekantik Vartalaap & Darshan/ 27-06-2025/ Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj (05:34-06:48)1

  1. https://www.youtube.com/watch?v=pnDXrXFkAHY

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