नए बच्चों को विवाह से डर क्यों लग रहा है? नशे के कारण समाज में दुराचार कैसे बढ़ रहा है और समाधान क्या है? – संत प्रेमानंद जी महाराज के विचार (EN)

प्रस्तावना

आज के समय में युवा पीढ़ी विवाह से डरने लगी है और नशे की प्रवृत्ति के कारण समाज में दुराचार, अपराध और अविश्वास बढ़ता जा रहा है। श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज ने अपने प्रवचन में इस समस्या के मूल कारण और समाधान पर गहराई से प्रकाश डाला है1।

समस्या का मूल कारण

1. नशा – समाज के पतन की जड़

महाराज जी के अनुसार, नशा आज समाज के पतन का मुख्य कारण बन चुका है। बहन-बेटियों के साथ होने वाली दुराचार की घटनाओं में नशा एक प्रमुख भूमिका निभाता है। नशे की हालत में इंसान का डर खत्म हो जाता है, सही-गलत का होश नहीं रहता और वह गलत कार्य कर बैठता है1।

2. अध्यात्म से दूरी

महाराज जी ने स्पष्ट कहा कि व्यभिचार, नशा, अधर्म, पाप, डिप्रेशन, चिंता – इन सबका एकमात्र समाधान है अध्यात्म। जब तक व्यक्ति अध्यात्म से नहीं जुड़ेगा, तब तक उसका सुधार संभव नहीं है। अध्यात्म से भय और संयम पैदा होता है, जिससे व्यक्ति पाप कर्म से बचता है1।

3. आधुनिकता की दौड़ में जिम्मेदारियों से विमुख

आज का युवा आधुनिकता की दौड़ में अपनी सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों से विमुख होता जा रहा है। क्लब जाना, शराब पीना, ड्रग्स लेना – इन आदतों ने समाज को खोखला कर दिया है। पति-पत्नी के रिश्तों में विश्वास की कमी आ गई है, जिससे विवाह से डर बढ़ रहा है1।

समाज पर प्रभाव

1. पारिवारिक संबंधों में अविश्वास

महाराज जी बताते हैं कि पहले पति-पत्नी को एक प्राण दो देह माना जाता था, लेकिन अब विश्वास की कमी के कारण गृहस्थ जीवन कठिन हो गया है। कई बार प्रेम के नाम पर विवाह के बाद हत्या जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं1।

2. युवा पीढ़ी में गलत आदतों का प्रचलन

नए बच्चे बिना बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड के जीना नहीं चाहते। पढ़ाई-लिखाई और उन्नति के समय में गंदी आदतें, नशा और व्यभिचार समाज को गर्त में ले जा रहे हैं। कई बार छोटे-छोटे बच्चे भी नशे और गलत आदतों के शिकार हो रहे हैं1।

3. अपराध और हिंसा में वृद्धि

नशे और व्यभिचार के लिए अर्थ की आवश्यकता पड़ती है, जिसके लिए युवा चोरी, हिंसा, यहां तक कि परिवार के सदस्यों की हत्या तक कर बैठते हैं। समाज में प्रेम, विश्वास और पवित्रता की कमी हो गई है1।

समाधान – अध्यात्म ही एकमात्र उपाय

1. अध्यात्म से जुड़ना

महाराज जी के अनुसार, अध्यात्म से जुड़ने पर ही नशा, व्यभिचार और गंदी आदतों से छुटकारा मिल सकता है। हजारों युवा सत्संग सुनकर, अध्यात्म को अपनाकर अपना जीवन बदल चुके हैं। अध्यात्म से इंद्रियां पवित्र होती हैं और व्यक्ति गलत आचरण से बचता है1।

2. संतोष और भगवान का ज्ञान

जब तक व्यक्ति भगवान और धर्म से नहीं जुड़ेगा, उसकी बुद्धि पवित्र नहीं होगी और वह धर्म का आचरण नहीं कर पाएगा। संतोष और भगवान का ज्ञान ही व्यक्ति को संयमित और पवित्र बनाता है1।

3. परिवार में प्रेम और विश्वास

गृहस्थ जीवन के लिए पति-पत्नी में प्रेम और विश्वास अनिवार्य है। जब तक दोनों सही नहीं होंगे, जीवन निर्वाह कठिन है। बच्चों को भी चाहिए कि वे पढ़ाई-लिखाई और उन्नति के समय को व्यर्थ न गंवाएं और गलत आदतों से बचें1।

महाराज जी का संदेश

  • नशा और व्यभिचार समाज को नष्ट कर रहे हैं।

  • बिना अध्यात्म के सुधार संभव नहीं है।

  • भगवान से जुड़ना ही जीवन में परिवर्तन ला सकता है।

  • छोटे-छोटे बच्चे भी नशे और व्यभिचार के शिकार हो रहे हैं, जो बेहद चिंता का विषय है।

  • समाज में विश्वास, प्रेम और पवित्रता की पुनर्स्थापना के लिए अध्यात्म का मार्ग अपनाना आवश्यक है।1

निष्कर्ष

महाराज जी के अनुसार, समाज में बढ़ते नशे और दुराचार को रोकने का एकमात्र उपाय अध्यात्म है। जब तक युवा भगवान, धर्म और पवित्र आचरण की ओर नहीं बढ़ेंगे, तब तक समाज का सुधार संभव नहीं है। समाज, परिवार और व्यक्तिगत जीवन में प्रेम, विश्वास और पवित्रता की पुनर्स्थापना के लिए अध्यात्म का मार्ग ही सर्वोत्तम है1।

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